संवेदनशील प्रशासन की मिसाल: IAS जितेंद्र कुमार सोनी ने पहल से बदली हजारों जिंदगियां
फटे जूतों से शुरू हुई सोच बनी बड़ा अभियान, IAS जितेंद्र कुमार सोनी की पहल से बदली बच्चों और जरूरतमंदों की ज़िंदगी
सर्दियों के मौसम में जब कई बच्चे फटे जूतों में स्कूल जाते नजर आए, तो आईएएस अधिकारी जितेंद्र कुमार सोनी ने इसे केवल एक सामान्य दृश्य मानकर नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने इसे प्रशासनिक जिम्मेदारी और मानवीय कर्तव्य के रूप में देखा। यहीं से “चरण पादुका अभियान” की शुरुआत हुई, जिसने आगे चलकर हजारों बच्चों के जीवन को छू लिया।
इस अभियान के तहत अब तक 1.76 लाख से अधिक विद्यार्थियों को जूते उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसका उद्देश्य केवल जूते देना नहीं था, बल्कि बच्चों को सम्मान, आत्मविश्वास और पढ़ाई के प्रति निरंतरता देना भी था। इस पहल की सफलता इतनी व्यापक रही कि राजस्थान के कई जिलों में इसे अपनाया गया और स्थानीय स्तर पर इसे आगे बढ़ाया गया।
जितेंद्र कुमार सोनी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। किसान परिवार में पले-बढ़े सोनी ने आर्थिक कठिनाइयों को नजदीक से देखा है। यही कारण है कि आज एक उच्च प्रशासनिक पद पर होने के बावजूद उनकी सोच आम लोगों की समस्याओं से जुड़ी हुई है। वे अपने पद से नहीं, बल्कि अपने मानवीय दृष्टिकोण और ज़मीनी काम से पहचान बनाते हैं।
जितेंद्र सोनी की एक और महत्वपूर्ण पहल “रक्तकोष” है। यह एक तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से दुर्लभ O-नेगेटिव रक्त की जरूरत वाले लोगों को समय पर सहायता मिल सकी। अब तक इस पहल से 8,000 से अधिक लोगों की जान बचाने में मदद मिली है। आपात स्थिति में रक्त उपलब्ध कराना इस प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य रहा है।
“विद्याप्रवाहिनी” यानी स्कूल-ऑन-व्हील्स के जरिए दूर-दराज़ क्षेत्रों में बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया गया। वहीं “ई-ज्ञानकेंद्र” ने डिजिटल माध्यम से पढ़ाई को आसान बनाया। इस प्लेटफॉर्म पर पहले ही महीने में 9,000 जीबी से अधिक शैक्षणिक सामग्री डाउनलोड की गई, जो इसकी उपयोगिता को दर्शाता है।