सोलर व पावर ग्रिड परियोजनाओं से किसान परेशान, विधानसभा में गूंजा मुआवज़े का मुद्दा

बाड़मेर, बालोतरा व जालोर में सोलर और पावर ग्रिड लाइनों से किसानों को नुकसान, विधानसभा में उठा मामला

Feb 14, 2026 - 21:28
सोलर व पावर ग्रिड परियोजनाओं से किसान परेशान, विधानसभा में गूंजा मुआवज़े का मुद्दा

बायतु विधायक हरीश चौधरी ने राजस्थान विधानसभा में नियम 295 के तहत महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। हरीश चौधरी ने कहा कि सोलर और पावर ग्रिड परियोजनाओं के नाम पर किसानों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों के हित में तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं। राजस्थान के बाड़मेर, बालोतरा और जालोर जिलों में चल रही सोलर परियोजनाओं और पावर ग्रिड कंपनी के कार्यों को लेकर किसानों में लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है। किसानों के खेतों से 400 केवी और 765 केवी की हाईटेंशन लाइनें बिछाई जा रही हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर बिना पूर्व सूचना और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में काम कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।

किसानों का कहना है कि परियोजनाओं के तहत खातेदारी भूमि पर लाइट पोल और कॉरिडोर स्थापित किए जा रहे हैं, लेकिन सर्वे और भूमि उपयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। कई किसानों को पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई, जिससे उन्हें अचानक अपनी जमीन पर काम होता दिखाई दिया। विरोध करने पर कुछ जगहों पर प्रशासनिक दबाव और पुलिस तैनाती की शिकायतें सामने आई हैं। विरोध कर रहे किसानों की गिरफ्तारी की घटनाएं भी हुई हैं।

विधायक हरीश चौधरी ने मुआवज़ा निर्धारण में गंभीर असमानता का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि समान प्रकृति की भूमि होने के बावजूद कुछ किसानों को ज्यादा और कई किसानों को बेहद कम मुआवज़ा दिया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के किसानों के साथ भेदभाव की शिकायतें भी सामने आई हैं। प्रति पोल और भूमि उपयोग के बदले दी जा रही राशि बाजार मूल्य के अनुरूप नहीं बताई जा रही। उन्होंने मांग की कि राज्य स्तर पर सोलर और पावर ग्रिड परियोजनाओं के लिए एकसमान, पारदर्शी और न्यायसंगत मुआवज़ा नीति बनाई जाए। मुआवज़ा उच्चतम डीएलसी दर या वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर तय किया जाए। साथ ही वार्षिक किराया दरों का पुनर्निर्धारण कर दीर्घकालिक भुगतान व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।

विधायक ने संयुक्त खातेदारी भूमि के मामलों में सभी खातेदारों की सहमति अनिवार्य करने, किसानों के लिए सुरक्षा बीमा, रिहायशी इलाकों से सुरक्षित दूरी तय करने और फसलों व वृक्षों के नुकसान का अग्रिम मुआवज़ा देने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसानों की जमीन, आजीविका और सामाजिक न्याय से जुड़ा है, इसलिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।