तहसीलदार की एक गलती और अब जेल जाने की तैयारी? विधायक की'औकात' पूछना पड़ा भारी, विधानसभा में मचा हड़कंप!
दौसा तहसीलदार गजानंद मीणा की विधायक दीनदयाल बैरवा से बदतमीजी पड़ी भारी! विशेषाधिकार हनन का नोटिस मंजूर,क्या जेल जाएंगे अफसर?
जयपुर ~ राजस्थान विधानसभा में इन दिनों ब्यूरोक्रेसी और जनप्रतिनिधियों के बीच का टकराव चर्चा का विषय बना हुआ है दौसा सेकांग्रेस विधायक दीनदयाल बैरवा और तहसीलदार गजानंद मीणा के बीच हुआ विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है विधायक बैरवा द्वारा दिए गए 'विशेषाधिकार हनन के नोटिस को विधानसभा स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है अब इस मामले की जांचविधानसभा की विशेषाधिकार समिति करेगी।
यह पूरा मामला 2 फरवरी को सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान शुरू हुआ था आरोप है कि तहसीलदार गजानंद मीणा नेविधायक के साथ बदसलूकी की और खुद को जमीन का मालिक बताया विधायक बैरवा का कहना है कि यह केवल उनकानहीं,बल्कि सदन के सभी 200 विधायकों का अपमान है उन्होंने ब्यूरोक्रेसी के बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्पीकर केबुलाने के बावजूद कलेक्टर का न आना प्रशासनिक निरंकुशता को दर्शाता है।
क्या तहसीलदार को होगी जेल ? समझिए आगे की प्रक्रिया
विशेषाधिकार हनन का नोटिस मंजूर होने के बाद अब गेंद केसाराम चौधरी की अध्यक्षता वाली 11 सदस्यीय समिति के पाले में हैयदि जांच में तहसीलदार दोषी पाए जाते हैं,तो उनके खिलाफ निलंबन या इंक्रीमेंट रोकने जैसी विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ जेलभेजने तक का प्रावधान है।
इतिहास गवाह है कि 2013 में भी राजस्थान विधानसभा ने एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर को समिति के साथ दुर्व्यवहार करने पर 30 दिन की जेल की सजा सुनाई थी।वर्तमान मामले में भी अगर सदन सख्त रुख अपनाता है,तो अधिकारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।फिलहाल,विधानसभा की इस कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि समिति अपनी रिपोर्टमें क्या रुख अपनाती है।