ओरण बचाओ पदयात्रा में विधायक रविंद्र भाटी का अनोखा समर्थन, आख़िर कौन है वो सख्स जिसे विधायक रविंद्र भाटी ने बिठाया कंधों पर

ओरण बचाओ पदयात्रा में शिव विधायक रविंद्र भाटी ने पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह को कंधों पर बैठाकर दिया अनोखा संदेश।

Feb 12, 2026 - 22:41
ओरण बचाओ पदयात्रा में विधायक रविंद्र भाटी का अनोखा समर्थन, आख़िर कौन है वो सख्स जिसे विधायक रविंद्र भाटी ने बिठाया कंधों पर

पिछले कुछ समय  से सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी एक व्यक्ति को अपने कंधों पर बिठाकर पदयात्रा में आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो बालेसर का है, जहाँ वे ओरण बचाओ पदयात्रा में शामिल हुए थे। आमतौर पर देखा जाता है कि जनता नेताओं को कंधों पर उठाती है, लेकिन इस बार विधायक ने खुद एक शख्स को कंधों पर बैठाकर अलग उदाहरण पेश किया।

ओरण बचाओ पदयात्रा पिछले 22 दिनों से जारी है। यह यात्रा जैसलमेर के प्रसिद्ध तनोट माता मंदिर से आरंभ हुई थी। लंबे सफर के बाद यह पदयात्रा बालेसर स्थित चामुंडा मंदिर पहुँची, जहाँ के वीडियो अब खूब चर्चा में हैं। पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य ओरण भूमि को बचाना है, जिसे सरकार द्वारा सोलर और मल्टीनेशनल कंपनियों को आवंटित किए जाने का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।

ओरण राजस्थान की वह जमीन होती है जिसे गांवों में धार्मिक आस्था से जोड़कर खाली छोड़ा जाता है। इस भूमि पर ना तो खेती की जाती है और ना ही व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति होती है। सदियों से यह क्षेत्र स्थानीय लोकदेवताओं के नाम पर संरक्षित है। ओरण भूमि पशुपालन के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है और यहाँ कई दुर्लभ पक्षियों व वन्यजीवों का प्राकृतिक निवास भी मिलता है। इस जमीन पर सोलर प्लांट लगाने के प्रस्ताव से स्थानीय लोग बेहद नाराज हैं।

वीडियो में विधायक के कंधों पर बैठे शख्स का नाम सुमेर सिंह भाटी सांवता है। वे क्षेत्र में पर्यावरण प्रेमी और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर के रूप में प्रसिद्ध हैं। सुमेर सिंह पिछले लगभग 10 वर्षों से ओरण बचाने के आंदोलन से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही वे राज्य पक्षी गोडावण और राज्य पशु ऊँट के संरक्षण के लिए भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इसी सम्मान और योगदान को देखते हुए विधायक रविंद्र भाटी ने उन्हें कंधों पर बैठाकर अपना समर्थन जताया।

ओरण बचाओ पदयात्रा के दौरान मिले इस अनोखे समर्थन ने स्थानीय लोगों में नई ऊर्जा भर दी है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आंदोलन से सरकार तक उनकी आवाज पहुँचेगी और ओरण भूमि को संरक्षित रखने की दिशा में सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।