तहसीलदार-विधायक बहस मामला: विधानसभा अध्यक्ष एक्शन मोड में, विशेषाधिकार हनन की प्रक्रिया शुरू
दौसा तहसीलदार और कांग्रेस विधायक बहस मामले में विधानसभा अध्यक्ष ने विशेषाधिकार हनन नोटिस स्वीकार किया
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि के बीच टकराव का मामला सुर्खियों में है। दौसा में तहसीलदार और कांग्रेस विधायक के बीच हुई बहस को लेकर अब विधानसभा स्तर पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस मामले में कांग्रेस विधायक की ओर से दिया गया विशेषाधिकार हनन का नोटिस स्वीकार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, 2 फरवरी को दौसा के तहसीलदार गजानंद मीणा और कांग्रेस विधायक दीनदयाल बैरवा के बीच किसी मुद्दे को लेकर तीखी बहस हो गई थी। इस दौरान विधायक ने तहसीलदार के व्यवहार को आपत्तिजनक और जनप्रतिनिधि की गरिमा के खिलाफ बताया। इसके बाद कांग्रेस की ओर से विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया गया।
विधानसभा अध्यक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नोटिस को मंजूर कर लिया है। माना जा रहा है कि अब यह मामला विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को सौंपा जा सकता है। स्पीकर ने स्पष्ट किया है कि सदन की गरिमा सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर उसका उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा। नोटिस स्वीकार होने के बाद अगला कदम जांच का है। विशेषाधिकार समिति दोनों पक्षों तहसीलदार और विधायक को तलब कर सकती है। समिति पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यदि जांच में तहसीलदार दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ निलंबन से लेकर विभागीय कार्रवाई तक की सिफारिश की जा सकती है। विधानसभा से जुड़े जानकारों का कहना है कि इससे पहले भी विशेषाधिकार हनन के मामलों में सख्त कदम उठाए गए हैं, ताकि सदन और जनप्रतिनिधियों की मर्यादा बनी रहे। विशेषाधिकार समिति में कुल 11 विधायक शामिल हैं। इसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के सदस्य मौजूद हैं, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके। समिति की सिफारिशों पर अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष ही लेते हैं।