सत्ता की 'धाक' पर भारी पड़ीं अपनों की यादें: मंच पर फूट-फूटकर रो पड़ीं वसुंधरा राजे, कहा- "ये दल का नहीं, दिल का रिश्ता है"

अपनों की याद में भावुक हुईं वसुंधरा राजे। माता, पिता और भाई का जिक्र कर छलके आंसू। कहा- मेरा लोगों से दिल का रिश्ता है।

Feb 21, 2026 - 21:48
सत्ता की 'धाक' पर भारी पड़ीं अपनों की यादें: मंच पर फूट-फूटकर रो पड़ीं वसुंधरा राजे, कहा- "ये दल का नहीं, दिल का रिश्ता है"
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक कार्यक्रम के दौरान

अपनों की यादों में भीगीं वसुंधरा राजे: मंच पर 'सख्त' नेता नहीं, एक भावुक बेटी और बहन का दिखा रूप

जयपुर/धौलपुर: राजस्थान की राजनीति में 'आयरन लेडी' के रूप में पहचानी जाने वाली पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का आज एक बेहद अलग और भावुक रूप देखने को मिला। अमूमन अपने कड़े निर्णयों और प्रशासनिक धाक के लिए जानी जाने वाली राजे आज एक सार्वजनिक मंच पर अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। मौका था उनके परिवार की स्मृतियों को याद करने का, जहां भावनाओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि सत्ता के शिखर पर रहने वाली यह नेता एक साधारण बेटी और बहन की तरह सिसकती नजर आईं।

कविता के शब्दों ने झकझोर दिया हृदय

कार्यक्रम के दौरान जब मंच से उनकी पूज्य माता विजयाराजे सिंधिया, पिता जीवाजीराव सिंधिया और भाई माधवराव सिंधिया को समर्पित एक कविता का पाठ किया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। कविता के शब्द जैसे ही राजे के कानों में पड़े, वे खुद को संभाल नहीं सकीं। पुरानी स्मृतियों ने उन्हें इस कदर घेरा कि वे मंच पर ही फूट-फूटकर रो पड़ीं।

काफी देर तक माहौल में सन्नाटा पसरा रहा और हर कोई इस पल का गवाह बना कि राजनीति की पथरीली राहों पर चलने वाले व्यक्ति के भीतर भी संवेदनाओं का एक गहरा सागर छिपा होता है।

"उनके बिना जीवन में सूनापन है"

कुछ देर बाद जब उन्होंने खुद को संभाला, तो उनकी आवाज कांप रही थी और गला भर आया था। भरे मन से उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा:

"मेरा लोगों से दल का नहीं, बल्कि दिल का रिश्ता है। आज मैं जो कुछ भी हूँ, अपने माता-पिता और भाई के दिए संस्कारों की बदौलत हूँ। उन्होंने ही मुझे जीवन में साहस और सही राह दिखाई। सच तो यह है कि उनके बिना जीवन में एक ऐसा सूनापन है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।"

शक्ति और संवेदना का संगम

यह पूरा घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में जहां अक्सर दांव-पेच की बातें होती हैं, वहां एक कद्दावर नेता का अपनी जड़ों और परिवार के प्रति ऐसा जुड़ाव यह याद दिलाता है कि पद और पावर से ऊपर भी एक दुनिया है—संवेदनाओं की दुनिया।

वसुंधरा राजे की यह भावुकता उनके समर्थकों के बीच भी गहरे तक उतर गई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना था कि आज उन्होंने किसी मुख्यमंत्री या नेता को नहीं, बल्कि एक ऐसी बेटी को देखा जो अपने माता-पिता के आशीर्वाद को आज भी अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानती है।

Mahaveer Sankhlecha I am a reporter dedicated to delivering accurate news and meaningful stories to the public.