राजस्थान के 50+ स्कूलों को बड़ा झटका: हाईकोर्ट का आदेश, प्री-प्राइमरी में भी RTE के तहत देना होगा एडमिशन

राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर मुख्यपीठ) ने RTE (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी स्तर (PP1, PP2, PP3 या नर्सरी-KG) से ही 25% आरक्षण अनिवार्य कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एंट्री लेवल जहां स्कूल नॉन-RTE बच्चों को एडमिशन देता है, वहीं से RTE का 25% कोटा लागू होगा। स्कूल अब केवल कक्षा-1 से मान्यता का तर्क देकर प्री-प्राइमरी स्तर पर कोटा से बच नहीं सकेंगे।

Jan 17, 2026 - 13:25
राजस्थान के 50+ स्कूलों को बड़ा झटका: हाईकोर्ट का आदेश, प्री-प्राइमरी में भी RTE के तहत देना होगा एडमिशन
AI जनरेटेड फ़ोटो

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत एडमिशन को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं (PP1, PP2, PP3 या नर्सरी से KG तक) चल रही हैं, वहां एंट्री लेवल यानी प्री-प्राइमरी से ही वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों को 25% आरक्षण देना अनिवार्य होगा। स्कूल अब केवल कक्षा-1 से मान्यता का हवाला देकर प्री-प्राइमरी स्तर पर इस कोटा से बच नहीं सकेंगे।

यह फैसला 16 जनवरी 2026 को जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार की 7 स्पेशल अपीलों का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया, जो 'रुकमणि बिड़ला मॉडर्न हाई स्कूल बनाम राजस्थान राज्य' मामले के 8 जनवरी 2026 के फैसले पर आधारित है। दोनों पक्षों (सरकार और निजी स्कूलों) ने सहमति जताई कि मामला उसी फैसले से कवर होता है, इसलिए वर्तमान अपीलों को भी उसी के आधार पर निस्तारित किया गया।

फैसले का दायरा और प्रभावित स्कूल

यह आदेश प्रदेश भर के उन निजी स्कूलों पर लागू होगा जहां प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित हैं। कुल मिलाकर 52 स्कूल सीधे प्रभावित होंगे, जिनमें शामिल हैं:जोधपुर के स्कूल जैसे शाह गोवर्धन लाल काबरा ज्ञान पीठ, मयूर चौपासनी स्कूल, दिल्ली पब्लिक अपर प्राइमरी स्कूल आदि। 

भीलवाड़ा जिले के लगभग 45 स्कूल, जैसे सेंट डी पब्लिक स्कूल, वैदिक एकेडमी आदि।

इन सभी स्कूलों को अब उन सभी निचली कक्षाओं (प्री-प्राइमरी स्तर) में 25% RTE कोटा लागू करना होगा, जहां वे नॉन-RTE (सामान्य) बच्चों को एडमिशन दे रही हैं। 

कोर्ट की मुख्य व्यवस्थाएं: RTE कोटा कैसे लागू होगा?

कोर्ट ने RTE एक्ट की धारा 12(1)(c) के तहत स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं:एंट्री लेवल पर 25% आरक्षण: प्री-प्राइमरी (PP1/PP2/PP3) स्तर पर ही वंचित वर्ग के 25% बच्चों को एडमिशन देना होगा। यह वह स्तर है जहां स्कूल सामान्य बच्चों को प्रवेश देता है। 

कक्षा-1 में स्थिति: यदि प्री-प्राइमरी स्तर पर 25% कोटा पूरा हो चुका है, तो कक्षा-1 में नए 25% RTE बच्चों की जरूरत नहीं, लेकिन कुल छात्रों में RTE का अनुपात 25% बना रहना चाहिए।

सीटें बढ़ने पर अनुपात बनाए रखना: उदाहरण के तौर पर, अगर कक्षा-1 में कुल 100 छात्र हैं और 25 RTE हैं, लेकिन बाद में कुल संख्या 200 हो जाती है, तो RTE छात्रों की संख्या भी बढ़ानी होगी ताकि 25% अनुपात बरकरार रहे।

मान्यता का तर्क खारिज: स्कूलों का तर्क कि राज्य सरकार केवल कक्षा-1 से मान्यता देती है, प्री-प्राइमरी से नहीं—कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मान्यता स्कूल की स्थापना से जुड़ी है, लेकिन इसका मतलब प्री-प्राइमरी स्तर पर मनमाना एडमिशन नहीं हो सकता।

 कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: RTE का उद्देश्य विफल नहीं होने देंगे

कोर्ट ने भावुक होकर कहा:"देश तरक्की कर रहा है और बच्चों का आईक्यू लेवल बढ़ गया है। अगर वंचित वर्ग के बच्चे प्री-प्राइमरी शिक्षा से महरूम रह गए, तो वे संपन्न परिवारों के बच्चों से पिछड़ जाएंगे। ऐसा होने पर आरटीई एक्ट का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।"