जल जीवन मिशन घोटाला: PHED के 3 अफसरों पर ACB की FIR, 1500 करोड़ के काम पर सवाल

राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले का पर्दाफाश, PHED के तीन अधिकारियों पर ACB की FIR दर्ज।

Jan 14, 2026 - 12:09
जल जीवन मिशन घोटाला: PHED के 3 अफसरों पर ACB की FIR, 1500 करोड़ के काम पर सवाल

राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत हुए कथित भ्रष्टाचार के मामले में अब जांच एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस बहुचर्चित घोटाले में लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे करोड़ों रुपये के ठेके बांटे और नियमों को दरकिनार कर चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाया।

किन अधिकारियों पर दर्ज हुई FIR

एसीबी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर जिन अधिकारियों को नामजद किया गया है, उनमें शामिल हैं—

  • दिनेश गोयल, तत्कालीन मुख्य अभियंता (विशेष परियोजना)
  • महेंद्र प्रकाश सोनी, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अजमेर), जो अब सेवानिवृत्त हैं
  • सिद्धार्थ टांक, अधिशासी अभियंता (परियोजना खंड, मांडल, भीलवाड़ा)

इन तीनों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

फर्जी शपथ पत्र और नियमों की अनदेखी

एसीबी की जांच में सामने आया है कि ठेकेदार कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी बोली क्षमता (Bidding Capacity) के शपथ पत्र तैयार किए गए। जिन कंपनियों के पास बड़े प्रोजेक्ट पूरा करने की क्षमता नहीं थी, उन्हें कागजों में योग्य दिखाकर करोड़ों रुपये के वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए। जांच एजेंसी का कहना है कि यह सब अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से हुआ, जिससे सरकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई।

1500 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध खेल

एसीबी के अनुसार, हैदराबाद की भूषणम कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधूरे कार्यों को पूरा दिखाने के लिए झूठे हलफनामे पेश किए गए। इन अधूरे कार्यों की अनुमानित लागत करीब 1493 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस घोटाले का एक बड़ा उदाहरण चंबल–भीलवाड़ा जल आपूर्ति परियोजना (चरण-2) के पैकेज-3 में सामने आया, जहां करीब 187.33 करोड़ रुपये के काम को कागजों में पूरा घोषित कर दिया गया।

ग्राउंड जीरो पर हकीकत कुछ और

जब एसीबी ने जमीनी स्तर पर जांच की, तो स्थिति बिल्कुल अलग निकली। कई गांवों में अब तक न तो जल आपूर्ति की कमीशनिंग हुई थी और न ही स्काडा (SCADA) तकनीक से जुड़े काम शुरू हुए थे।यानी जिन गांवों तक पानी पहुंचना था, वहां अब भी लोग इंतजार कर रहे थे, जबकि फाइलों में पाइपलाइन बिछने और काम पूरा होने का दावा कर भुगतान की तैयारी कर ली गई थी।

जनता को पानी नहीं, फाइलों में बहा पैसा

जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है, लेकिन इस कथित घोटाले में आम जनता को पानी मिलने से पहले ही कागजों में पैसा बहा दिया गया। एसीबी का मानना है कि इस पूरे मामले में सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।

जांच का दायरा और बढ़ेगा

एसीबी ने साफ किया है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और आने वाले दिनों में पीएचईडी के अन्य अधिकारियों, ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है। फिलहाल एजेंसी सभी संबंधित फाइलों, शपथ पत्रों और भुगतान प्रक्रिया की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि भ्रष्टाचार की यह श्रृंखला कितनी दूर तक फैली हुई है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़ा यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले समय में एसीबी की अगली कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारियों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।