बच्चों के मोबाइल और सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती, हाई कोर्ट ने मांगी गाइडलाइन

16 साल से कम उम्र के बच्चों के मोबाइल और सोशल मीडिया इस्तेमाल पर हाई कोर्ट सख्त, नियम बनाने के संकेत

Dec 27, 2025 - 15:00

राजस्थान हाई कोर्ट ने बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्पष्ट गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने 29 नवंबर को कहा कि मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर असर डाल रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक स्टडी के मुताबिक 15 से 24 साल के करीब 90 प्रतिशत युवाओं के पास स्मार्टफोन है और उनमें से अधिकांश अपना लगभग पूरा डेटा सोशल मीडिया पर खर्च कर रहे हैं।

इसी तरह मद्रास हाई कोर्ट ने भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस जी. जयचंद्रन और जस्टिस के. गोविंदराजन की खंडपीठ ने कहा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने जैसे कदमों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। कोर्ट ने माना कि इंटरनेट और सोशल मीडिया बच्चों की सुरक्षा के लिए नया खतरा बनते जा रहे हैं और इस दिशा में सरकार को व्यापक नीति बनानी चाहिए।

कोर्ट ने सुझाव दिया कि जब तक कोई ठोस कानून नहीं बनता, तब तक राज्य सरकारें और बाल अधिकार संरक्षण आयोग मिलकर नियमों का खाका तैयार करें। साथ ही बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट के दुरुपयोग से बचाने में माता-पिता की जिम्मेदारी भी तय की जाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी बच्चों के सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई गई है।

आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। असर-2024 रिपोर्ट के अनुसार भारत में 14 से 16 साल के 82 प्रतिशत बच्चे स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं और इनमें से 76 प्रतिशत सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। नेशनल सैंपल सर्वे के मुताबिक 9 से 17 साल के बच्चों के 66 प्रतिशत अभिभावकों का मानना है कि सोशल मीडिया, ओटीटी और ऑनलाइन गेमिंग से बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और आक्रामकता बढ़ी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत में भी बच्चों के इंटरनेट और सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम बन सकते हैं, जैसा कि कई विकसित देशों में पहले से लागू है।