डूंगरपुर में कलेक्टर के सामने उबली सियासत, दिशा बैठक बनी अखाड़ा
डूंगरपुर की दिशा बैठक में एजेंडे को लेकर सांसद और विधायक भिड़े, बहस खुली चुनौती तक जा पहुंची।
डूंगरपुर में सोमवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय राजनीतिक संग्राम में बदल गई, जब जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस खुली चुनौती और धमकी तक पहुंच गई। जिला परिषद के ईडीपी सभागार में चल रही इस बैठक में सांसदों और विधायकों के बीच हुआ टकराव करीब 15 मिनट तक चला, जिससे प्रशासनिक अमला भी असहज स्थिति में आ गया।
बैठक में मौजूद थे वरिष्ठ अधिकारी
दिशा बैठक में जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सांखला सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक का उद्देश्य केंद्र सरकार की योजनाओं की समीक्षा और जिले में उनके क्रियान्वयन की स्थिति पर चर्चा करना था, लेकिन शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण हो गया।
एजेंडे से हटते ही शुरू हुआ विवाद
बैठक की शुरुआत में बीएपी सांसद राजकुमार रोत ने एजेंडे से इतर राज्य सरकार से जुड़े मुद्दों को उठाना शुरू किया। इस पर उदयपुर से भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दिशा बैठक का मकसद केंद्र सरकार की योजनाओं की समीक्षा है, इसलिए चर्चा एजेंडे के अनुसार ही होनी चाहिए। इसी बात पर दोनों सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
तू–तू, मैं–मैं में बदली बहस
राजकुमार रोत ने कहा कि वे बैठक के अध्यक्ष हैं और जनता से जुड़े हर मुद्दे पर चर्चा करना उनका अधिकार है। इस पर मन्नालाल रावत ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि वे निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और उन्हें धमकाया जा रहा है। देखते ही देखते बहस का स्वर तेज होता चला गया और दोनों सांसदों के बीच तू–तू, मैं–मैं की स्थिति बन गई।
विधायक की एंट्री से और बिगड़े हालात
इसी दौरान आसपुर विधायक उमेश डामोर भी बहस में कूद पड़े। उनकी एंट्री के बाद विवाद और ज्यादा गरमा गया। गुस्से में विधायक डामोर ने सांसद मन्नालाल रावत को सीधे चुनौती देते हुए कहा, “लड़ाई करनी हो तो बाहर आ जाओ, मैदान में आओ खुलकर।” यह बात सुनते ही सभागार में मौजूद लोग सकते में आ गए।
करीब 15 मिनट तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
करीब 15 मिनट तक चली इस हाई-वोल्टेज बहस के दौरान बैठक की कार्यवाही पूरी तरह ठप हो गई। जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों को बीच-बचाव के लिए आगे आना पड़ा। माहौल इतना गर्म हो गया कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी स्थिति संभालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
प्रशासन की कोशिशों से हुआ समझौता
जिला कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की। अन्य सदस्यों के हस्तक्षेप और समझाइश के बाद आखिरकार मामला शांत हुआ। इसके बाद बैठक की कार्यवाही दोबारा शुरू की जा सकी, लेकिन तब तक माहौल में भारी तल्खी बनी रही।
राजनीतिक मर्यादा पर उठे सवाल
कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हुई इस घटना ने जनप्रतिनिधियों की भाषा, व्यवहार और राजनीतिक मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विकास योजनाओं की समीक्षा के लिए बुलाई गई बैठक में इस तरह का टकराव न केवल बैठक के उद्देश्य से भटका हुआ नजर आया, बल्कि आम जनता के बीच भी गलत संदेश गया।
दिशा बैठक के उद्देश्य पर असर
इस पूरे घटनाक्रम के कारण दिशा बैठक का मुख्य उद्देश्य कुछ समय के लिए पीछे छूट गया। प्रशासनिक स्तर पर यह चिंता भी जताई जा रही है कि यदि इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती रहीं, तो विकास कार्यों की समीक्षा और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी असर पड़ सकता है।डूंगरपुर की दिशा बैठक में हुआ यह सियासी संग्राम लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा, जहां विकास से ज्यादा टकराव ने सुर्खियां बटोर लीं।