राजस्थान में आर-पार: बेनीवाल का जयपुर कूच और धोरीमना में कांग्रेस की हुंकार, घेरे में सरकार!

राजस्थान में बढ़ा सियासी पारा! हनुमान बेनीवाल का किसानों के साथ जयपुर कूच और धोरीमना में डोटासरा-पायलट की आक्रोश रैली। जानें क्या हैं किसानों की 6 सूत्री मांगें और सरकार पर बढ़ता दोहरा दबाव।

Jan 13, 2026 - 19:32
राजस्थान में आर-पार: बेनीवाल का जयपुर कूच और धोरीमना में कांग्रेस की हुंकार, घेरे में सरकार!

राजस्थान की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है। राज्य सरकार के खिलाफ एक साथ दो बड़े मोर्चे खुलने से शासन और प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक तरफ नागौर सांसद और आरएलपी (RLP) प्रमुख हनुमान बेनीवाल किसानों और युवाओं के हुजूम के साथ जयपुर की ओर कूच कर चुके हैं, तो दूसरी तरफ धोरीमना में होने वाली जन आक्रोश रैली ने सरकार के लिए दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है।

रियांबड़ी से जयपुर की ओर बढ़ा किसानों का 'महापड़ाव'

नागौर जिले के रियांबड़ी में पिछले आठ दिनों से किसान अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। प्रशासन के साथ वार्ता विफल होने और मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के बाद, हनुमान बेनीवाल ने मंगलवार को इस आंदोलन को निर्णायक मोड़ दे दिया। अल्टीमेटम खत्म होते ही हजारों की संख्या में किसान और युवा जयपुर की ओर निकल पड़े हैं।इस 'जयपुर कूच' के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। जगह-जगह भारी पुलिस बल तैनात है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।

किसानों की वे 6 प्रमुख मांगें, जो बनीं आंदोलन की वजह

हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन मुख्य रूप से 6 सूत्री मांगों पर केंद्रित है:

1. अवैध बजरी खनन: क्षेत्र में फल-फूल रहे अवैध बजरी खनन पर तत्काल और सख्त रोक लगाई जाए।

2. फसल बीमा क्लेम: किसानों के बकाया फसल बीमा क्लेम का जल्द से जल्द भुगतान हो।

3. रेलवे लाइन का कार्य: पुष्कर–मेड़ता–रास रेलवे लाइन के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए।

4. बिजली दरें: हाई टेंशन बिजली की बढ़ती दरों से किसानों को राहत दी जाए।

5. मुकदमों की वापसी: आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए 'राजनीतिक मुकदमे' वापस लिए जाएं।

6. युवाओं के मुद्दे: रोजगार और भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो।

धोरीमना में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन

पश्चिमी राजस्थान के धोरीमना में भी सियासी पारा सातवें आसमान पर है। यहाँ जिला सीमाओं के पुनर्गठन के विरोध में लंबे समय से धरना चल रहा है। इस आंदोलन की कमान कांग्रेस के कद्दावर नेता हेमाराम चौधरी ने संभाल रखी है।14 जनवरी को यहाँ एक विशाल 'जन आक्रोश रैली' प्रस्तावित है। इस रैली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के शामिल होने की चर्चा है। इन दिग्गजों की मौजूदगी ने इस आंदोलन को और अधिक धार दे दी है, जिससे सरकार पर चौतरफा दबाव बन गया है।

सरकार के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौतियां

राजस्थान सरकार इस वक्त दोहरे मोर्चे पर घिरी हुई है। एक ओर हनुमान बेनीवाल की जमीनी पकड़ और युवाओं का साथ है, तो दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर की एकजुटता और सीमा पुनर्गठन जैसा संवेदनशील मुद्दा।जानकारों का मानना है कि यदि इन आंदोलनों का समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में राजधानी जयपुर में बड़ा प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। फिलहाल, इंटेलिजेंस और पुलिस प्रशासन हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए है।

 निकलेगा बीच का रास्ता?

अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री और शासन के रुख पर टिकी हैं। क्या सरकार बेनीवाल की मांगों को मानकर जयपुर कूच को रोकने में सफल होगी? या फिर धोरीमना की रैली सरकार के खिलाफ एक नई राजनीतिक क्रांति का आगाज करेगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल राजस्थान की सड़कों पर मचे इस शोर ने सत्ता के गलियारों में खलबली जरूर पैदा कर दी है।