राजस्थान में कैब एग्रीगेटर्स के लिए नई पॉलिसी लागू: ड्राइवरों की सुरक्षा और यात्रियों के हित में बड़े बदलाव
राजस्थान परिवहन विभाग ने कैब एग्रीगेटर कंपनियों (जैसे ओला, उबर) के लिए नई मोटर व्हीकल एग्रीगेटर पॉलिसी लागू कर दी है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना, ड्राइवरों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और किराए में पारदर्शिता लाना है।
जयपुर। राजस्थान परिवहन विभाग ने गिग वर्कर्स और कैब ड्राइवरों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने राजस्थान मोटर व्हीकल एग्रीगेटर पॉलिसी को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। संयुक्त शासन सचिव एवं अतिरिक्त आयुक्त परिवहन ओपी बुनकर ने गुरुवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया। इससे पहले करीब 10 दिन पूर्व पॉलिसी का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर आमजन और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए थे। प्राप्त फीडबैक पर विचार के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की गई है।
इस नई पॉलिसी से प्रदेश में ओला, उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के संचालन पर सख्त नियम लागू होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना, ड्राइवरों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और किराए में पारदर्शिता लाना है। नियमों का पालन न करने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई होगी।
किराया अब सरकार तय करेगी, ड्राइवर को 80% हिस्सा अनिवार्य
पॉलिसी के तहत कैब का किराया राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
कुल किराए का 80% हिस्सा सीधे वाहन मालिक (ड्राइवर) को मिलेगा।
बिना उचित कारण के राइड कैंसल करने पर ड्राइवर या यात्री पर अधिकतम 100 रुपये की पेनल्टी लग सकेगी। इससे अनावश्यक कैंसिलेशन पर रोक लगेगी।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए सख्त प्रावधान
सभी एग्रीगेटर कंपनियों के लिए 24×7 सक्रिय कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर खोलना अनिवार्य।
ऐप पर यात्री अपनी लाइव लोकेशन शेयर कर सकेंगे।
आपातकालीन स्थिति में पैनिक बटन से अलर्ट सीधे पुलिस और कंट्रोल रूम तक पहुंचेगा।
महिला यात्रियों के लिए महिला ड्राइवर चुनने का विकल्प उपलब्ध होगा।
लाइसेंस और अन्य अनिवार्यताएं
कंपनियों को 5 वर्ष के लिए लाइसेंस जारी किया जाएगा।
आवेदन शुल्क 10,000 रुपये और लाइसेंस शुल्क अधिकतम 5 लाख रुपये तक।
हर साल ड्राइवरों की रिफ्रेशर ट्रेनिंग कराना अनिवार्य।
प्रत्येक ड्राइवर के लिए कंपनी को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा प्रदान करना होगा।
किसी वाहन की अधिकतम आयु 8 वर्ष से ज्यादा नहीं हो सकेगी।
राजस्थान में संचालन के लिए राज्य में कार्यालय खोलना और एक अधिकृत शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य।
कंपनियों को अपनी वाहन संख्या के आधार पर 10 लाख से 50 लाख रुपये तक की सुरक्षा जमा राशि जमा करानी होगी।
हर कंपनी में शिकायत निपटारे के लिए ग्रिवांस ऑफिसर की नियुक्ति जरूरी।
उल्लंघन पर कड़ी सजा
नियमों की अवहेलना पर कंपनी का लाइसेंस 3 महीने तक निलंबित किया जा सकेगा।
एक वित्तीय वर्ष में तीन बार निलंबन या किसी गंभीर अपराध की पुष्टि पर लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द हो जाएगा।
यह पॉलिसी केंद्र सरकार की मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस-2025 से प्रेरित है और राजस्थान में कैब सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी एवं ड्राइवर-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गिग इकोनॉमी में कार्यरत लाखों ड्राइवरों को फायदा होगा, साथ ही यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा।