साध्वी प्रेम बाईसा की मौत,आध्यात्मिक सफर और सवाल
जोधपुर में कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा का निधन,बचपन से भक्ति तक का सफर और मौत के बाद उठे कई गंभीर सवाल
राजस्थान की कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा का बुधवार को जोधपुर में निधन हो गया गुरुवार को पोस्टमॉर्टम के दौरान विवाद की स्थिति बनी, जिसके बाद शाम करीब 6:30 बजे उनका शव बालोतरा जिले के परेऊ गांव पहुंचा परेऊ गांव में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा साध्वी के असामयिक निधन से क्षेत्र में शोक और चर्चा का माहौल है।
बचपन से भक्ति की ओर झुका जीवन
परेऊ गांव निवासी प्रेम बाईसा का जीवन संघर्ष और आस्था से जुड़ा रहा पांच साल की उम्र में उनकी मां का निधन हो गया था इससे पहले ही वे माता-पिता को भक्ति में देख चुकी थीं पिता वीरमनाथ ट्रक ड्राइवर थे, जबकि मां अमरू बाईसा धार्मिक व्रत और साधना में लगी रहती थीं परिवार के विरोध के बाद माता-पिता बेटी को लेकर जोधपुर चले गए और गुरुकृपा आश्रम में रहने लगे।
आश्रम में मिली आध्यात्मिक शिक्षा
जोधपुर के आश्रम में रहते हुए प्रेम बाईसा ने संतों के सान्निध्य में भजन, कथा और आध्यात्मिक शिक्षा ली मां के निधन के बाद उन्होंने संत राजाराम जी और कृपाराम जी महाराज से मार्गदर्शन लिया छोटी उम्र में ही कथा वाचन और भजन गायन में उनकी रुचि लोगों के बीच पहचान बनने लगी 12 साल की उम्र में पहली कथा की ओर इसके बाद आसपास के क्षेत्रों में उनके प्रति श्रद्धा बढ़ती गई उन्होंने जोधपुर में अपना अलग आश्रम बनाया और बड़ी संख्या में भक्त जुड़े।
मौत के बाद उठे सवाल और विवाद
साध्वी की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं पुलिस के अनुसार, उनकी तबीयत दो दिनों से खराब थी और किसी इंजेक्शन के बाद हालत बिगड़ी परिजनों द्वारा शव को अस्पताल की एंबुलेंस से न ले जाकर निजी वाहन से आश्रम ले जाना,पोस्टमॉर्टम को लेकर हिचक और सोशल मीडिया पर संदिग्ध पोस्ट ने मामले को और उलझा दिया है पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।