स्कूल बसों में ओवरलोड बच्चे देख भड़कीं बाड़मेर सेक्रेटरी: ‘जानवरों से भी बुरा हाल’, 18 बाल वाहिनियां सीज़
बाड़मेर में विधिक सेवा प्राधिकरण की सेक्रेटरी कृष्णा गुप्ता ने प्राइवेट स्कूलों की बाल वाहिनियों की जांच की। ओवरलोड बच्चों, मॉडिफाइड सीटों और बिना जीपीएस-कैमरों वाली बसें मिलने पर 18 गाड़ियां सीज़ की गईं। सेक्रेटरी ने सुरक्षा के नाम पर लापरवाही पर सख्त नाराज़गी जताई।
बाड़मेर। प्राइवेट स्कूलों की बाल वाहिनियों में हो रही लापरवाही और नियमों की खुली धज्जियों पर बुधवार को बड़ी कार्रवाई हुई। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर बाड़मेर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सेक्रेटरी एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्णा गुप्ता ने डेजी डेंस इंटरनेशनल स्कूल की स्कूल बसों का औचक निरीक्षण किया।
जैसे ही उन्होंने पहली बस में बच्चों की स्थिति देखी, वे नाराज़गी पर काबू नहीं रख सकीं। बस में बच्चों को इस हद तक ठूंसकर बैठाया गया था कि उनके बैठने-खड़े होने तक की जगह नहीं थी। कई बच्चे बेहद असुविधा में सफर कर रहे थे।
“क्या ये बच्चे हैं या जानवर जिन्हें इस तरह ठूंस दिया गया?” — सेक्रेटरी
ओवरलोडिंग देखकर सेक्रेटरी ने बस चालक से सख्त लहजे में पूछा—
“बताओ, कितने बच्चे लेकर जाते हो? गिनती करके बताओ… खाली सीटें दिख रही हैं, उनमें भी बच्चे ठूंस-ठूंसकर भर रखे हैं। यह कौन-सा नियम है?”
उन्होंने बस में लगी मॉडिफाइड सीटों पर भी सवाल उठाया—
“ये सीटें किस खाते में लगाई गईं? जब पकड़े गए तो कहते हो हटा देंगे… बच्चों की हालत जानवरों से भी बुरी है।”
सेक्रेटरी ने कहा कि इतनी भीड़ में एक-दो बच्चे बेहोश हो जाएं, गिर जाएं या कोई हादसा हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा?
8–10 बसें निकली, जबकि स्कूल पहले 4 बताता रहा
निरीक्षण के दौरान स्कूल प्रशासन बार-बार बसों की संख्या बदलता रहा।
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पहले 4 बसें बताई,
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फिर 6,
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जबकि मौके पर 8 से 10 बसें स्कूल के नाम और लोगो के साथ खड़ी मिलीं।
सेक्रेटरी ने इसे बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ बताते हुए कहा—
“स्कूल प्रशासन बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा फीस पर ध्यान देता है। वास्तविक स्थिति छुपाने की कोशिश की गई है। ड्राइवरों तक को गलत जानकारी दी जा रही है।”
स्कूल बसों में मिली गंभीर खामियां
निरीक्षण के दौरान बसों में कई गंभीर कमियां पाई गईं—
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क्षमता से दोगुने बच्चे
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मॉडिफाइड सीटें
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किसी बस में कैमरे नहीं
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जीपीएस का अभाव
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कई बसों के डॉक्यूमेंट अधूरे
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ड्राइवरों की वर्दी पर स्कूल का लोगो, जबकि स्कूल स्वामित्व से इंकार करता रहा
सेक्रेटरी ने कहा—
“100–200 रुपये बचाने के चक्कर में अभिभावक अपने बच्चों को जोखिम में डाल रहे हैं। बाद में हादसा होता है तो लोग रोते हैं, जबकि जागरूकता पहले जरूरी है।”
आरटीओ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई— 18 बाल वाहिनियां सीज़
निरीक्षण टीम में सदर थाने के एएसआई और आरटीओ इंस्पेक्टर रमेश चावड़ा मौजूद रहे।
आरटीओ ने बताया—
“सीजेएम मैडम के साथ कार्रवाई में 18 स्कूल वाहिनियां सीज़ की गई हैं। सीटिंग क्षमता, डॉक्यूमेंट और मॉडिफिकेशन के आधार पर नियमों का उल्लंघन पाया गया है।”
आरटीओ ने कहा कि आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी और सभी बसों का रिकॉर्ड दोबारा जांचा जाएगा।
अभिभावकों से अपील
सेक्रेटरी कृष्णा गुप्ता ने अभिभावकों से कहा—
“कृपया देखें कि आपके बच्चे किस हालत में स्कूल जाते हैं। बस की क्षमता, सुरक्षा उपकरण, सीट—all चेक करें। बच्चों की सुरक्षा किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए।”