बासनपीर प्रकरण: जैसलमेर थानाधिकारी पर हाईकोर्ट की सख्ती, जमानती वारंट जारी
जैसलमेर के बासनपीर मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए सदर थानाधिकारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया।
जैसलमेर जिले के बासनपीर प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सदर थाना जैसलमेर के थानाधिकारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। मामला ऐतिहासिक छतरियों के पुनर्निर्माण से जुड़े विवाद से संबंधित है, जिसकी सुनवाई पिछले कुछ समय से हाईकोर्ट में चल रही है।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे केस डायरी के साथ स्वयं अदालत में उपस्थित हों। इसके बावजूद जांच अधिकारी की गैरहाजिरी पर न्यायालय ने नाराजगी जताई और थानाधिकारी के विरुद्ध जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि वारंट की तामील संबंधित पुलिस अधीक्षक के माध्यम से सुनिश्चित की जाए।
यह मामला इस्लाम खान के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सरवर खान ने दलील दी कि एफआईआर में घटना का समय गलत दर्शाया गया है। उनके अनुसार, जिस समय घटना बताई गई है, उस समय याचिकाकर्ता सरकारी स्कूल में अपनी ड्यूटी पर मौजूद था।
इस प्रकरण में अब तक करीब 250 लोगों को नामजद किया गया है और पुलिस द्वारा 25 लोगों की गिरफ्तारी भी की जा चुकी है। आरोप है कि इन लोगों ने राजकार्य में बाधा पहुंचाई।
बताया जा रहा है कि यह विवाद वर्ष 2019 से चला आ रहा है। आरोप है कि एक अध्यापक ने कुछ लोगों को उकसाकर ऐतिहासिक छतरी को तुड़वाया था। इसके बाद ‘झुंझार धरोहर बचाओ संघर्ष समिति’ ने विरोध प्रदर्शन किया था। साल 2021 में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर दोनों पक्षों की सहमति और प्रशासन की मौजूदगी में काम दोबारा शुरू हुआ, लेकिन बाद में इसे फिर से रोक दिए जाने के आरोप लगे।
गौरतलब है कि यह छतरी वर्ष 1828 में जैसलमेर और बीकानेर के बीच हुए युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए झांझर रामचंद्र सोडा की स्मृति में बनवाई गई थी। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।