मुर्गी फार्म की आड़ में छिपी थी 100 करोड़ की 'एमडी' की फैक्ट्री, पुलिस ने बुलडोजर से नेस्तनाबूद किया!
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के धनुरी थाना क्षेत्र में नांद का बास गांव स्थित एक मुर्गी फार्म की आड़ में अवैध एमडी ड्रग्स फैक्ट्री चल रही थी। महाराष्ट्र पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मुख्य आरोपी अनिल सिहाग (31) को गिरफ्तार किया गया।
झुंझुनूं, 17 दिसंबर 2025: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक साधारण मुर्गी फार्म की आड़ में चल रही थी एक खतरनाक ड्रग्स फैक्ट्री, जहां से मौत का सामान तैयार हो रहा था। आज पुलिस ने इस अवैध फैक्ट्री पर बुलडोजर चलाकर इसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। दो दिन पहले महाराष्ट्र पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल (एएनसी) की छापेमारी में इस फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ था, जहां 10 किलो एमडी (मेथिलीनडायोक्सीमेथामफेटामाइन) ड्रग्स, खतरनाक केमिकल्स और मशीनें जब्त की गईं। इन सभी की अनुमानित कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह मामला न केवल ड्रग तस्करी की गहरी जड़ों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे ग्रामीण इलाकों में अपराधी आम कारोबार की आड़ में खतरनाक धंधे चला रहे हैं।
चाचा के मुर्गी फार्म पर भतीजे का काला कारोबार
कहानी की शुरुआत होती है धनुरी थाना क्षेत्र के नांद का बास गांव से, जहां 31 वर्षीय अनिल सिहाग ने अपने चाचा सुरेश सिहाग के मुर्गी फार्म को मौत की फैक्ट्री में बदल दिया था। अनिल महज 12वीं पास है और खेतीबाड़ी का काम करता है। 2016-17 से वह चाचा के फार्म पर काम कर रहा था, लेकिन करीब 15 दिन पहले उसने अपने साथी सुभाष जाट के साथ यहां एमडी ड्रग्स बनाने का धंधा शुरू कर दिया। फार्म में दो कमरों को फैक्ट्री में तब्दील किया गया, जहां मशीनें लगाई गईं और खतरनाक केमिकल्स का स्टोरेज रखा गया। एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय ने बताया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत ऐसी जगह को ड्रग्स उत्पादन के लिए इस्तेमाल करना गंभीर अपराध है। बुधवार को झुंझुनूं पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फार्म के दो कमरों, एक टीन शेड छप्पर और बाउंड्री वॉल को बुलडोजर से तोड़ दिया।
डोडा-चूरा तस्करी से एमडी ड्रग्स तक का सफर
जांच में खुलासा हुआ कि अनिल और सुभाष का अपराधी सफर डोडा-चूरा (अफीम का चूरा) की तस्करी से शुरू हुआ था। सुभाष अपनी कार में मध्य प्रदेश के नीमच से डोडा-पोस्त लाता था, और अनिल उसके साथ 5-7 चक्कर लगा चुका था। हर चक्कर में अनिल को 5 हजार रुपये मिलते थे। वे यह माल बग ड़ रोड पर होटलों और ढाबों पर सप्लाई करते थे। धीरे-धीरे अनिल ने खुद तस्करी शुरू की। उसने नीमच के हाईवे पर एक ढाबा मालिक पप्पू गुर्जर से संपर्क बनाया और अपनी पुरानी स्विफ्ट गाड़ी में डोडा-पोस्त भरकर लाने लगा। इसे वह तारानगर में अपने जानकार विकास जाट को बेचता था, जहां प्रति किलो 500 से 700 रुपये का मुनाफा कमाता था। इस दौरान पुलिस ने उसे एक बार पकड़ा भी था, लेकिन वह नहीं सुधरा।
शरीफ का फोन और सीकर में गिरफ्तारी का ड्रामा
पूछताछ में अनिल ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि 13 दिसंबर की देर शाम एक शख्स 'शरीफ' का फोन आया, जिसने कहा कि वे 3-4 दिन से इंतजार कर रहे हैं। "माल देना है तो दे जाओ, नहीं तो पार्टी वापस जा रही है।" इस पर अनिल ने अगले दिन सीकर आने की बात कही। 14 दिसंबर को सुबह वह 1 किलो एमडी लेकर सीकर पहुंचा। कलेक्ट्रेट के सामने मिलन होटल पर सुबह 6:30 बजे महाराष्ट्र पुलिस ने उसे दबोच लिया।
पीछा करते हुए पहुंची पुलिस, साथी फरार
महाराष्ट्र पुलिस के इंस्पेक्टर निकेत कौशिक ने बताया कि अनिल से उसके साथी बिज्जू के बारे में पूछा गया। अनिल ने वॉट्सऐप कॉल कर बिज्जू को सीकर के जयपुर रोड पर बुलाया। जैसे ही बिज्जू आया, पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी स्विफ्ट कार को तेज रफ्तार में पीछे भगाकर फरार हो गया। इसके बाद पुलिस टीम अनिल को लेकर नांद का बास गांव पहुंची, जहां चाचा के मुर्गी फार्म पर फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ। यहां से 10 किलो एमडी, केमिकल्स और मशीनें बरामद की गईं। अनिल और सुभाष को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बिज्जू की तलाश जारी है।