जैसलमेर बस हादसे के बाद नितिन गडकरी का फैसला: स्लीपर बसों के लिए सख्त नियम, अब जुगाड़ नहीं चलेगा
जैसलमेर बस हादसे के बाद केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों के नियम सख्त किए, जानें नए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स
देश में स्लीपर कोच बसों में लगातार हो रही आग की घटनाओं और बीते छह महीनों में 145 लोगों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्लीपर बसों के निर्माण और संचालन से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया है। यह फैसला हाल ही में हुए जैसलमेर बस हादसे के बाद लिया गया, जिसमें 21 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी।
केवल मान्यता प्राप्त कारखानों में होगा निर्माण
नए नियमों के तहत अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल वाहन निर्माता कंपनियों या केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त (Accredited) कारखानों में ही किया जा सकेगा। स्थानीय या अनधिकृत वर्कशॉप में बस बॉडी बनवाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सरकार का मानना है कि छोटी वर्कशॉप में बनने वाली बसों में अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
‘जुगाड़’ और अवैध मॉडिफिकेशन पर लगेगी रोक
सरकारी जांच में सामने आया है कि ज्यादातर बस अग्निकांड ‘जुगाड़’ और गैरकानूनी मॉडिफिकेशन की वजह से होते हैं। जैसलमेर हादसे में भी यही सामने आया। जिस बस का पंजीकरण ‘नॉन-एसी’ के रूप में हुआ था, उसे नियमों के खिलाफ जाकर ‘एसी बस’ में बदल दिया गया। अवैध वायरिंग और ओवरलोडिंग के कारण शॉर्ट-सर्किट हुआ और कुछ ही मिनटों में पूरी बस आग की चपेट में आ गई।
नई स्लीपर बसों के लिए अनिवार्य तकनीकी मानक
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि अब हर स्लीपर बस में आधुनिक सुरक्षा सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम (FDS), ड्राइवर को नींद या थकान आने पर चेतावनी देने वाला AI आधारित सेंसर, आपातकालीन रोशनी, हथौड़े और स्पष्ट निकास द्वार शामिल हैं। इन उपकरणों का मकसद हादसे की स्थिति में यात्रियों को समय पर बाहर निकलने का मौका देना है।
पुरानी बसों पर भी लागू होंगे नए नियम
सरकार ने साफ किया है कि यह नियम केवल नई बसों तक सीमित नहीं रहेंगे। पहले से सड़कों पर चल रही स्लीपर बसों को भी इन सुरक्षा मानकों के अनुसार अपडेट करना होगा। यदि किसी बस में फायर अलार्म, इमरजेंसी लाइट या अन्य जरूरी उपकरण नहीं पाए गए, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों की जवाबदेही तय
जैसलमेर हादसे के बाद एसीबी की जांच में प्रशासनिक लापरवाही भी सामने आई है। नियमों के उल्लंघन के बावजूद फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के आरोप में चित्तौड़गढ़ के डीटीओ और एक सहायक अधिकारी को निलंबित किया गया है। नितिन गडकरी ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर ऐसे सभी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने बस बॉडी बिल्डरों को ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ की अनुमति दी।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
नए नियमों के लागू होने से यात्रियों को अधिक सुरक्षित सफर मिलेगा। अब बसों में अग्नि-रोधी सामग्री का इस्तेमाल होगा और तकनीकी खामियों की संभावना कम होगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्लीपर बसों में यात्रा करने वाले लोगों की जान से कोई समझौता न हो।
बस की जानकारी कैसे जांचें?
यात्री ‘mParivahan’ ऐप या ‘Parivahan Sewa’ पोर्टल पर बस का नंबर डालकर उसका पंजीकरण विवरण देख सकते हैं। यहां यह भी जांचा जा सकता है कि बस एसी है या नॉन-एसी और उसका फिटनेस सर्टिफिकेट वैध है या नहीं।कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह फैसला स्लीपर बस यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सख्त नियमों और निगरानी के जरिए सरकार भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकना चाहती है।