राजस्थान मिड-डे मील घोटाला: कोविड काल में 2000 करोड़ की बंदरबांट का खुलासा

कोविड के दौरान राजस्थान में मिड-डे मील राशन घोटाले का खुलासा, ACB ने 2000 करोड़ के खेल में 21 आरोपियों पर FIR की।

Jan 8, 2026 - 10:35
राजस्थान मिड-डे मील घोटाला: कोविड काल में 2000 करोड़ की बंदरबांट का खुलासा

राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। यह मामला कोविड-19 महामारी के दौरान बच्चों के मिड-डे मील (Mid Day Meal) राशन वितरण से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि इस योजना के नाम पर करीब 2000 करोड़ रुपये की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। ACB ने इस मामले में कॉन्फेड (CONFED) के वरिष्ठ अधिकारियों और कई निजी फर्मों सहित 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

कोविड काल में बदली गई मिड-डे मील व्यवस्था

कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद होने के कारण बच्चों को स्कूलों में पका हुआ मिड-डे मील नहीं दिया जा सका। इसके बजाय राज्य सरकार ने बच्चों के घर तक दाल, तेल और मसालों के ‘कॉम्बो पैक’ पहुंचाने की योजना शुरू की। इस योजना का उद्देश्य यह था कि बच्चों को पोषण मिलता रहे और उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। लेकिन ACB की जांच में सामने आया कि इसी योजना को भ्रष्टाचार का जरिया बना लिया गया।

टेंडर प्रक्रिया में की गई हेराफेरी

जांच के अनुसार, कॉन्फेड के कुछ अधिकारियों ने टेंडर की शर्तों में जानबूझकर बदलाव किए। इन शर्तों को इस तरह डिजाइन किया गया कि कई ईमानदार और योग्य फर्में बाहर हो गईं। इसके बाद कुछ चुनिंदा और ‘चहेती’ फर्मों को ठेका दे दिया गया। यही नहीं, टेंडर मिलने के बाद कई फर्मों ने काम खुद करने के बजाय अवैध रूप से इसे दूसरी छोटी संस्थाओं को सौंप दिया। इससे पूरे सिस्टम में अनियमितताओं का जाल फैल गया।

बिना सप्लाई के पास कराए गए फर्जी बिल

ACB की जांच में यह भी सामने आया कि कई जगहों पर राशन की सप्लाई हुई ही नहीं, लेकिन फिर भी ऊंची दरों पर बिल बनाकर पास कराए गए। कहीं घटिया सामग्री सप्लाई की गई तो कहीं केवल कागजों में ही डिलीवरी दिखाई गई। एगमार्क और FSSAI मानकों का हवाला देकर भुगतान निकाला गया, जबकि हकीकत में मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई।

21 आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

इस मामले में ACB ने कुल 21 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें कॉन्फेड के कई रसूखदार अधिकारी शामिल हैं। एफआईआर में सहायक लेखाधिकारी सांवतराम, प्रबंधक राजेंद्र और लोकेश कुमार बापना, प्रतिभा सैनी, योगेंद्र शर्मा और राजेंद्र सिंह शेखावत जैसे नाम दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा मैसर्स तिरूपति सप्लायर्स, जागृत एंटरप्राइजेज और साई ट्रेडिंग जैसी निजी फर्मों के मालिक भी जांच के दायरे में हैं।

राजकोष को हुआ भारी नुकसान

ACB की विस्तृत पड़ताल में यह निष्कर्ष निकला है कि इस सुनियोजित घोटाले से राजस्थान सरकार के खजाने को करीब 2000 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है। यह राशि बच्चों के पोषण और शिक्षा पर खर्च होनी थी, लेकिन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। जांच एजेंसी का मानना है कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध भी है, क्योंकि इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ा।

आगे की जांच जारी

ACB ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। दस्तावेजों और बैंक लेन-देन की गहन जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटालों पर लगाम लगाई जा सके।यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि संकट के समय चलाई गई जनकल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी कितनी जरूरी है।