राजस्थान में 502 जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे, 212 में छात्रों को तुरंत शिफ्ट करने के आदेश

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों के सर्वे के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। कुल 502 राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों के भवन जर्जर पाए गए, जिनमें से 212 इतने खराब हैं कि वहां पढ़ाई जारी रखना बच्चों के लिए असुरक्षित है।

Dec 31, 2025 - 14:39
राजस्थान में 502 जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे, 212 में छात्रों को तुरंत शिफ्ट करने के आदेश

जयपुर, 31 दिसंबर 2025। राजस्थान में सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश भर में कुल 502 राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों के भवन जर्जर हालत में पाए गए हैं। इनमें से 212 स्कूलों की बिल्डिंग इतनी खस्ता है कि वहां बच्चों को बैठाना जानलेवा साबित हो सकता है। इन स्कूलों के छात्रों को अस्थायी रूप से निकटतम सुरक्षित स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। वहीं, शेष 290 स्कूलों में छात्रों को उसी परिसर के अन्य सुरक्षित क्लासरूम में स्थानांतरित कर कक्षाएं जारी रखी जाएंगी।

यह फैसला पांच महीने पहले झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में हुए heartbreaking हादसे के बाद किए गए व्यापक सर्वे पर आधारित है। जुलाई 2025 में पिपलोदी के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। हादसे के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने खुद जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा था, "जिम्मेदार तो मैं ही हूं।" इसके बाद全省 स्तर पर संभावित खतरनाक स्कूल भवनों का सर्वे कराया गया, जिसके नतीजे अब सामने आए हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले: प्रतापगढ़ टॉप पर

सर्वे में 34 जिलों के 290 स्कूल भवनों को जर्जर चिह्नित किया गया है, जहां छात्रों को आंतरिक शिफ्टिंग की जाएगी। सबसे खराब स्थिति प्रतापगढ़ जिले की है, जहां 26 स्कूल भवन पूरी तरह असुरक्षित पाए गए। इसके बाद बीकानेर में 18, बालोतरा में 16 और झालावाड़ में 15 स्कूल भवन बेहद खराब हालत में हैं। अन्य जिलों में भी दर्जनों स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है। 

माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने बताया, "212 स्कूल भवन इतने जर्जर हैं कि वहां पढ़ाई जारी रखना सुरक्षित नहीं। मरम्मत कार्य पूरा होने तक इनके छात्रों को सबसे निकटतम सुरक्षित राजकीय स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा। कोशिश रहेगी कि एक ही कक्षा के सभी छात्र एक साथ पढ़ें और प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व माध्यमिक स्तर के बच्चे अलग-अलग कक्षाओं में व्यवस्थित हों, ताकि पढ़ाई पर कोई असर न पड़े।"

जरूरत पड़ी तो शिफ्ट में चलेंगी कक्षाएं

यदि किसी सुरक्षित स्कूल में छात्रों की संख्या अचानक बढ़ने से जगह की कमी हो जाती है, तो कक्षाएं दो शिफ्टों में चलाई जाएंगी – सुबह और दोपहर। इससे सभी बच्चों की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित रहेगी। महात्मा गांधी सरकारी स्कूल (MGGS) जो पहले से किसी अन्य स्कूल में चल रहे हैं, उन्हें भी जरूरत पड़ने पर अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की अनुमति दी गई है।

अभिभावकों को पूरी जानकारी, ड्रॉपआउट पर सख्त निगरानी

शिफ्टिंग की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने के लिए अभिभावकों को लिखित सूचना दी जाएगी और स्कूल नोटिस बोर्ड पर जानकारी चस्पा की जाएगी। साथ ही, स्टाफ की जिम्मेदारी तय की गई है। शिक्षक अभिभावकों से निरंतर संपर्क में रहेंगे, व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर मॉनिटरिंग करेंगे और स्थानीय स्तर पर काउंसलिंग करेंगे, ताकि कोई बच्चा स्कूल से दूर न हो और ड्रॉपआउट की स्थिति न बने। जिला शिक्षा अधिकारी, पीईईओ और सीबीईओ को निगरानी की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है।यह कदम बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उठाया गया है। विभाग का कहना है कि मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर शुरू होगा, ताकि जल्द से जल्द सभी स्कूल सुरक्षित हो सकें। पिपलोदी हादसे जैसी त्रासदी दोबारा न हो, इसके लिए अब सतर्कता और तेज कार्रवाई पर जोर है।