सोना-चांदी में ऐतिहासिक गिरावट: एक दिन में ₹1 लाख टूटी चांदी, खरीदें या रुकें?

सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट से बाजार में हड़कंप, जानिए गिरावट की वजह और निवेश सलाह

Jan 31, 2026 - 13:56
सोना-चांदी में ऐतिहासिक गिरावट: एक दिन में ₹1 लाख टूटी चांदी, खरीदें या रुकें?

पिछले कुछ दिनों से लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे सोना और चांदी के दाम अचानक धड़ाम हो गए हैं। शुक्रवार को आई तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। खासतौर पर चांदी में एक ही दिन में ₹1 लाख से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे सर्राफा बाजार में खलबली मच गई।

भारतीय बाजार में आज क्या हैं भाव?

शुक्रवार की गिरावट के बाद घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतें इस प्रकार रहीं—

24 कैरेट सोना: ₹1,60,580 प्रति 10 ग्राम

22 कैरेट सोना: ₹1,47,200 प्रति 10 ग्राम

18 कैरेट सोना: ₹1,20,440 प्रति 10 ग्राम

वहीं चांदी का भाव करीब ₹3,40,000 प्रति किलो के आसपास बना हुआ है।

चांदी में एक दिन में ₹1 लाख से ज्यादा की गिरावट

गुरुवार को चांदी ने ऐतिहासिक स्तर छुआ था और ट्रेडिंग के दौरान ₹4,20,048 प्रति किलो तक पहुंच गई थी। लेकिन शुक्रवार को 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी गिरकर ₹2,91,922 प्रति किलो तक आ गई। यानी महज 24 घंटे में निवेशकों को भारी झटका लगा।

गिरावट के पीछे क्या हैं वैश्विक कारण?

इस तेज उतार-चढ़ाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़ी खबरें मानी जा रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वार्श को फेड का नया चेयरमैन बनाए जाने के संकेतों के बाद वैश्विक बाजारों का रुख बदल गया। इसके साथ ही ऊंचे दामों पर पहुंचे सोना-चांदी में बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा।

गिरावट के बावजूद चांदी की मांग क्यों मजबूत?

हालांकि दाम गिरे हैं, लेकिन चांदी की मांग अब भी मजबूत बनी हुई है। सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। एक सोलर पैनल में करीब 20 ग्राम और एक इलेक्ट्रिक कार में 25 से 50 ग्राम चांदी लगती है। वहीं पिछले कई वर्षों से चांदी की खपत, उत्पादन से ज्यादा बनी हुई है।

निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में उतार-चढ़ाव का जोखिम सोने से कहीं ज्यादा होता है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर खरीदारी करने से बचना चाहिए। सही रणनीति यही है कि कीमतों में गिरावट के दौरान ही निवेश किया जाए और कुल पोर्टफोलियो का केवल 5% से 15% हिस्सा ही सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं में रखा जाए।