होली पर सियासत से ऊपर संवेदना: ओरण पदयात्रियों के बीच पहुंचे छोटू सिंह, मिठाई भी नहीं हुई स्वीकार
होली के अवसर पर विधायक छोटू सिंह ओरण पदयात्रा में शामिल लोगों के बीच मिठाई लेकर पहुंचे, लेकिन पदयात्रियों ने मिठाई लेने से इनकार कर दिया।
होली जैसे उल्लास और रंगों के पर्व पर जहां जनप्रतिनिधि आमतौर पर समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ जश्न में शामिल नजर आते हैं, वहीं इस बार तस्वीर कुछ अलग थी। क्षेत्रीय विधायक छोटू सिंह ने उत्सव से दूरी बनाकर ओरण पदयात्रा में शामिल लोगों के बीच पहुंचकर संवेदना जताई, लेकिन वहां उन्हें निराशा हाथ लगी।
कुछ दिन पूर्व ओरण टीम से बातचीत में विधायक छोटू सिंह ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा था—
“जब आप होली के अवसर पर बाहर हैं और हम घरों में उत्सव मना रहे होते हैं, तो मन को पीड़ा होती है। आज यदि मेरा भाई नखत बाहर होता, तो क्या मुझे पीड़ा नहीं होती?”
उनके इस कथन ने साफ किया था कि वे इस मुद्दे को केवल राजनीतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं के साथ देख रहे हैं। होली के अवसर पर वे मिठाई लेकर पदयात्रियों के पास पहुंचे। उनका उद्देश्य पर्व की मिठास बांटते हुए संवाद कायम करना था, लेकिन पदयात्रा में शामिल लोगों ने मिठाई लेने से इनकार कर दिया।
पदयात्रियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और सरकार व जनप्रतिनिधियों के प्रति आक्रोश स्वाभाविक है। निरंतर पैदल चलकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे इन लोगों के भीतर असंतोष गहरा है। ऐसे में प्रतीकात्मक सद्भावना को भी उन्होंने स्वीकार नहीं किया।
हालांकि यह भी उतना ही सच है कि किसी जनप्रतिनिधि के लिए हर समस्या का समाधान तत्काल संभव नहीं होता। सरकार का हिस्सा होने के बावजूद कई बार स्थानीय विधायक भी नीतिगत निर्णयों के सामने असहाय स्थिति में होते हैं। सूत्रों का कहना है कि छोटू सिंह इस विषय पर सरकार स्तर पर संवाद की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन परिस्थितियां उनके पक्ष में नहीं दिख रही हैं।
होली जैसे अवसर पर एक विधायक का रंग-गुलाल से दूर रहकर आंदोलनकारियों के बीच जाना और फिर निराश होकर लौटना, यह दृश्य राजनीति से अधिक मानवीय संवेदनाओं की कहानी कहता है। यह घटना इस बात का संकेत भी देती है कि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच संवाद की खाई बढ़ रही है, जिसे पाटना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।