राजस्थान में ओल्ड पेंशन स्कीम पर संकट के बादल: कमजोर संस्थाओं को NPS में शिफ्ट करने की छूट, कर्मचारियों के हितों पर सवाल

राजस्थान में पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) पर फिर से संकट मंडरा रहा है। वित्त विभाग ने कमजोर आर्थिक स्थिति वाले बोर्ड, निगम, स्वायत्त संस्थाओं और विश्वविद्यालयों को OPS बंद कर न्यू पेंशन स्कीम (NPS) लागू करने की छूट दी है।

Oct 10, 2025 - 11:10
राजस्थान में ओल्ड पेंशन स्कीम पर संकट के बादल: कमजोर संस्थाओं को NPS में शिफ्ट करने की छूट, कर्मचारियों के हितों पर सवाल

राजस्थान के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच पुरानी पेंशन स्कीम (ओल्ड पेंशन स्कीम-OPS) को लेकर एक बार फिर से आशंकाओं का माहौल पैदा हो गया है। पिछली अशोक गहलोत सरकार द्वारा अप्रैल 2023 में लागू की गई OPS को वर्तमान भजनलाल शर्मा सरकार ने पहले ही जनवरी 2024 में नए नियुक्तियों के लिए बंद कर दिया था, लेकिन अब राज्य के वित्त विभाग ने एक नया आदेश जारी कर कमजोर आर्थिक स्थिति वाली संस्थाओं को OPS को पूरी तरह बंद कर न्यू पेंशन स्कीम (NPS) में शिफ्ट करने की छूट दे दी है। इस कदम से बोर्ड, निगम, स्वायत्त संस्थाओं और विश्वविद्यालयों जैसे संस्थानों के हजारों कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है, जहां अब तक OPS लागू थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राज्य की आर्थिक तंगी को दर्शाता है, लेकिन कर्मचारी संगठन इसे OPS के खिलाफ 'धीमी मौत' बता रहे हैं।

वित्त विभाग का नया आदेश: OPS बंद करने की खुली छूटरा

जस्थान वित्त विभाग ने हाल ही में जारी आदेश के तहत उन सभी संस्थाओं को राहत दी है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनके पास पर्याप्त पेंशन फंड नहीं है। इनमें राज्य के विभिन्न बोर्ड, निगम, स्वायत्त निकाय और विश्वविद्यालय शामिल हैं। आदेश के अनुसार, ऐसी संस्थाएं अपने बोर्ड स्तर पर निर्णय लेकर सरकार से मंजूरी प्राप्त कर OPS को समाप्त कर NPS में परिवर्तन कर सकती हैं। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "यदि संस्था के पास पेंशन फंड में पर्याप्त धनराशि नहीं है और आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है, तो OPS लागू न करने का विकल्प चुना जा सकता है।" इस प्रक्रिया में संस्था को अपने पेंशन फंड में जमा राशि को ब्याज सहित कर्मचारियों को वापस लौटाना होगा। यह आदेश राज्य की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों ने इसे OPS की वापसी के वादों के खिलाफ धोखा करार दिया है।

OPS की यात्रा: अप्रैल 2023 से उतार-चढ़ाव भरी कहानी

OPS को राजस्थान में बहाल करने का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जाता है। 20 अप्रैल 2023 को जारी अधिसूचना के माध्यम से राज्य सरकार ने OPS को पुनः लागू किया था, जिसके तहत रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में गारंटीड मिलना था। इस बदलाव के लिए कर्मचारियों और पेंशनर्स से OPS में शिफ्ट होने का विकल्प भरवाया गया था।हालांकि, दिसंबर 2023 में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद OPS पर ब्रेक लग गया। जनवरी 2024 में नए नियुक्तियों के लिए NPS को अनिवार्य कर दिया गया, जिससे कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी फैली।  अब यह नया आदेश मौजूदा OPS को भी खतरे में डाल रहा है, खासकर उन संस्थाओं के लिए जो घाटे में चल रही हैं। वित्त विभाग के अनुसार, OPS लागू न करने पर संस्था को NPS में कटौतियां शुरू करनी होंगी, लेकिन कर्मचारियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

पेनल्टी का बोझ संस्थाओं पर: कर्मचारियों को राहत

OPS से NPS में शिफ्ट होने पर सबसे बड़ी चिंता पेनल्टी और लेट फीस की थी। वेतन से कटौती रुकने के कारण NPS फंड में देरी से जमा होने वाली राशि पर जुर्माना लगता है। लेकिन वित्त विभाग के आदेश में साफ प्रावधान है कि यह पेनल्टी और लेट फीस संबंधित संस्था ही वहन करेगी। कर्मचारियों को केवल सामान्य कटौतियां देनी होंगी। एक कर्मचारी संगठन के नेता ने कहा, "यह छूट अच्छी है, लेकिन OPS को बचाने की बजाय इसे कमजोर करने का प्रयास है। संस्थाएं आर्थिक दबाव में NPS चुनेंगी, और अंततः OPS खत्म हो जाएगी।" विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिफ्ट होने पर पहले जमा राशि को समायोजित किया जाएगा, और रिटायरमेंट तक कर्मचारी NPS में योगदान जारी रख सकेंगे। 

PFRDA का पुराना 'नो': OPS बहाली में सबसे बड़ा रोड़ा

OPS बहाली की राह में सबसे बड़ा अवरोध पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) रहा है। अप्रैल 2023 में OPS लागू करने के बाद गहलोत सरकार ने NPS में जमा लगभग 39,000 करोड़ रुपये की राशि वापस मांगी थी, जो 2004 से कर्मचारियों और सरकार के अंशदान से एकत्र हुई थी। लेकिन PFRDA ने इसे देने से साफ इनकार कर दिया, तर्क देते हुए कि यह फंड बाजार-आधारित है और OPS जैसे गारंटीड स्कीम के लिए ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।  

इस विवाद ने OPS को पूरी तरह लागू करने में बाधा डाली। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा लॉन्च की गई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) ने भी बहस को नया मोड़ दिया है, जो NPS में 50 प्रतिशत गारंटीड पेंशन का प्रावधान करती है। राजस्थान में UPS को लागू करने की चर्चा है, लेकिन OPS समर्थक इसे अपर्याप्त बता रहे हैं।

कर्मचारी संगठनों का आक्रोश: 'OPS ही एकमात्र हितकारी विकल्प'

राजस्थान में OPS संघर्ष समिति और अन्य यूनियनों ने इस आदेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सितंबर 2024 में राज्य मंत्री विजय सिंह से मुलाकात के दौरान उन्होंने OPS को यथावत रखने की मांग की थी, और मंत्री ने भी संकेत दिए थे कि OPS बंद नहीं होगी।  लेकिन नया आदेश आने के बाद संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि OPS को कमजोर किया गया, तो राज्यव्यापी हड़ताल होगी।एक ओर जहां ऑक्टूबर 2024 में सरकार ने NPS से निकाली गई 25 प्रतिशत अग्रिम राशि को रिटायरमेंट तक जमा करने की छूट दी थी,वहीं अब यह छूट केवल मजबूत संस्थाओं तक सीमित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य का पेंशन बजट पहले ही 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का बोझ है, और NPS जैसे बाजार-आधारित सिस्टम ही दीर्घकालिक समाधान हैं।