बाड़मेर सियासत: अमीन खान ने क्यों बनाई 'जन आक्रोश रैली' से दूरी? उम्मेदाराम बेनीवाल से मुलाकात के बाद बड़ा बयान!

बाड़मेर में सीमा विवाद को लेकर सियासी बवाल! पूर्व विधायक अमीन खान ने धोरीमना रैली में जाने से किया इनकार, वहीं सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल को बताया शरीफ। जानिए सचिन पायलट की एंट्री से पहले क्या है बाड़मेर का पूरा राजनीतिक समीकरण।

Jan 14, 2026 - 12:24
बाड़मेर सियासत: अमीन खान ने क्यों बनाई 'जन आक्रोश रैली' से दूरी? उम्मेदाराम बेनीवाल से मुलाकात के बाद बड़ा बयान!

राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर में इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर है। जिलों की सीमाओं के पुनर्गठन को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक मोड़ पर आ गया है। इस बीच कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक अमीन खान के ताजा बयानों ने नई चर्चा छेड़ दी है।

सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल के साथ रणनीति

हाल ही में पूर्व विधायक अमीन खान ने बाड़मेर सर्किट हाउस में प्रदेश स्तरीय नेताओं और बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद खान ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि आगामी चुनावों को लेकर बेहतर रणनीति बनाई गई है। उन्होंने सांसद बेनीवाल की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक 'शरीफ व्यक्ति' बताया और आश्वासन दिया कि वे चुनाव में उनकी पूरी मदद करेंगे।

धोरीमना रैली से अमीन खान ने बनाई दूरी

एक तरफ जहाँ कांग्रेस के बड़े नेता धोरीमना में जुटने वाले हैं, वहीं अमीन खान ने इस रैली से खुद को अलग कर लिया है। जब उनसे जन आक्रोश रैली में शामिल होने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमें वहां जाने के लिए किसी ने आमंत्रित नहीं किया है, इसलिए हम वहां नहीं जाएंगे।" उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि यह उनका निजी कार्यक्रम है और वही इसे देखें, हालांकि उन्होंने किसी भी तरह की नाराजगी से इनकार किया है।

पुनर्गठन विवाद और हेमाराम चौधरी का मोर्चा

धोरीमना में बाड़मेर-बालोतरा सीमाओं के पुनर्गठन के विरोध में पिछले दो सप्ताह से धरना जारी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी खुद धरने पर डटे हुए हैं। उन्हें सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल और विधायक हरीश चौधरी का भी समर्थन प्राप्त है।

सचिन पायलट और डोटासरा की मौजूदगी से बढ़ेगी सरगर्मी

14 जनवरी को प्रस्तावित इस 'जन आक्रोश रैली' में प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट शामिल हो रहे हैं। बड़े नेताओं की मौजूदगी से यह आंदोलन अब और उग्र होने की संभावना है।

सरकार का रुख और भविष्य की तस्वीर

हैरानी की बात यह है कि इतने दिनों से चल रहे धरने के बावजूद सरकार की ओर से अभी तक हेमाराम चौधरी से कोई संवाद नहीं किया गया है। यह इस बात का संकेत है कि सरकार फिलहाल अपने निर्णय पर अडिग है। अब देखना यह होगा कि इस महा-रैली के जरिए विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने में कितना कामयाब होता है।