अशोक गहलोत का तीखा हमला: बाड़मेर-बालोतरा सीमा फेरबदल को बताया 'तुगलकी फरमान', भाजपा पर सियासी रोटियां सेंकने का आरोप!
राजस्थान सरकार ने 31 दिसंबर 2025 की मध्यरात्रि को बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में फेरबदल किया, जिसमें बायतु को बालोतरा से हटाकर बाड़मेर में और गुड़ामालानी-धोरीमन्ना को बालोतरा में शामिल किया गया
बाड़मेर, 4 जनवरी 2026: राजस्थान के सरहदी जिलों बाड़मेर और बालोतरा की सीमाओं में 31 दिसंबर 2025 की मध्यरात्रि को अचानक किए गए फेरबदल ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे 'तुगलकी फरमान' करार देते हुए तीखा हमला बोला है। गहलोत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यह फैसला जनता की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि आगामी परिसीमन और राजनीतिक समीकरण साधने के लिए लिया गया है। वहीं, भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर जश्न मनाया, जबकि कांग्रेस समर्थकों ने धोरीमन्ना में धरना शुरू कर दिया। आइए, इस विवाद की पूरी पड़ताल करते हैं।
क्या हुआ फेरबदल? नए नक्शे की हकीकत
राजस्व विभाग की 31 दिसंबर को जारी अधिसूचना के तहत:बायतु उपखंड को बालोतरा से हटाकर वापस बाड़मेर जिले में शामिल किया गया।
गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड को बाड़मेर से हटाकर बालोतरा में जोड़ा गया।
अब बालोतरा जिले में 5 उपखंड और 9 तहसीलें होंगी, जबकि बाड़मेर में 7 उपखंड और 11 तहसीलें।
यह बदलाव 2023 में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए बालोतरा जिले की मूल संरचना से उलट है। उस समय बालोतरा को अलग जिला बनाने का उद्देश्य प्रशासन को जनता के करीब लाना था। लेकिन नए फेरबदल से गुड़ामालानी क्षेत्र के लोगों के लिए बालोतरा मुख्यालय की दूरी बढ़ गई है – पहले की तुलना में 50-100 किमी ज्यादा। स्थानीय लोग इसे बड़ी असुविधा बता रहे हैं।
अशोक गहलोत का पूरा बयान: 'जनता के साथ घोर अन्याय'
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने X (ट्विटर) पर लिखा:बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में 31 दिसंबर की मध्यरात्रि को आनन-फानन में किया गया फेरबदल राज्य सरकार का एक और 'तुगलकी फरमान' है।बायतु को बाड़मेर और गुड़ामालानी-धोरीमन्ना को बालोतरा में शामिल करने का फैसला प्रशासनिक दृष्टि से कतई तर्कसंगत नहीं है। इससे गुड़ामालानी क्षेत्र की जनता के लिए जिला मुख्यालय की दूरी कम होने के बजाय और बढ़ गई है, जो आमजन के साथ घोर अन्याय है।यह स्पष्ट है कि यह निर्णय जनता की सहूलियत के लिए नहीं, बल्कि आगामी परिसीमन और सियासी समीकरणों को साधने के लिए लिया गया है। हमारी सरकार ने प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने की मंशा से नए जिले बनाए थे, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार जनभावनाओं को दरकिनार कर केवल 'सियासी रोटियां' सेकने में व्यस्त है।हम इस जनविरोधी निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।
गहलोत के इस पोस्ट को हजारों लाइक्स और रीपोस्ट मिले, जो कांग्रेस का पक्ष मजबूत दिखा रहे हैं।
भाजपा का जश्न, कांग्रेस का विरोध
भाजपा कार्यकर्ता इस बदलाव को प्रशासनिक सुधार बता रहे हैं और पटाखे फोड़कर खुशी जता रहे हैं।
कांग्रेस ने इसे राजनीतिक चाल करार दिया। धोरीमन्ना में धरना शुरू हो गया है, पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने भी समर्थन किया।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह बदलाव आगामी विधानसभा परिसीमन को प्रभावित करेगा। बायतु क्षेत्र से कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं, जबकि भाजपा को फायदा मिल सकता है।
क्यों अब यह बदलाव? जनगणना का कनेक्शनजनगणना 2027 के लिए 1 जनवरी 2026 से प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज हो गई हैं। 31 दिसंबर आखिरी तारीख थी, इसलिए सरकार ने आनन-फानन में यह आदेश जारी किया। अब इन सीमाओं में बदलाव मुश्किल होगा, जो इसे स्थायी बना देता है।