पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बाड़मेर के नेताओं पर भरोसा, भाजपा-कांग्रेस ने दी बड़ी जिम्मेदारी

बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा व कांग्रेस ने बाड़मेर के नेताओं को अहम जिम्मेदारी देकर सियासी संकेत दिए।

Jan 3, 2026 - 17:48
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बाड़मेर के नेताओं पर भरोसा, भाजपा-कांग्रेस ने दी बड़ी जिम्मेदारी

पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय राजनीति में दिलचस्प सियासी हलचल देखने को मिल रही है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस—दोनों ही प्रमुख राष्ट्रीय दलों ने राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर से जुड़े नेताओं को पश्चिम बंगाल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपकर साफ कर दिया है कि वे इस चुनाव को लेकर कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। यह कदम न सिर्फ संगठनात्मक मजबूती का संकेत देता है, बल्कि यह भी बताता है कि बंगाल की सियासत में इस बार बाहरी राज्यों के अनुभवी नेताओं की भूमिका अहम रहने वाली है।

भाजपा ने कैलाश चौधरी पर जताया भरोसा

भारतीय जनता पार्टी ने बाड़मेर के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को पश्चिम बंगाल में बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी है। कैलाश चौधरी को लंबे समय से एक अनुभवी संगठनकर्ता के रूप में जाना जाता है। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें पश्चिम बंगाल में प्रवासी प्रभारी की भूमिका दी है, जिसके तहत वे पिछले कई महीनों से लगातार राज्य में सक्रिय हैं।कैलाश चौधरी जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और बूथ स्तर तक पार्टी की पकड़ को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, वे विभिन्न जिलों में संगठनात्मक बैठकों, कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रमों और रणनीतिक चर्चाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। भाजपा का मानना है कि कैलाश चौधरी का संगठनात्मक अनुभव और ग्रामीण क्षेत्रों की राजनीति की समझ बंगाल में पार्टी को मजबूती दे सकती है।

जमीनी काम पर फोकस, संगठन विस्तार की रणनीति

भाजपा की रणनीति इस बार सिर्फ बड़े नेताओं के दौरों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करना मुख्य लक्ष्य है। कैलाश चौधरी को इसी सोच के तहत जिम्मेदारी दी गई है। वे स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय बनाकर संगठन की कमियों को दूर करने और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर काम कर रहे हैं।पार्टी सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल जैसे जटिल राजनीतिक माहौल में बाहरी लेकिन अनुभवी नेताओं की भूमिका संतुलन बनाने में मददगार साबित हो सकती है। यही वजह है कि भाजपा ने बाड़मेर जैसे दूरस्थ क्षेत्र के नेता को बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी है।

कांग्रेस ने शमा बानो को सौंपी महिला कांग्रेस की कमान

वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी पश्चिम बंगाल को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और बाड़मेर से जुड़ी नेता शमा बानो को पश्चिम बंगाल महिला कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस जिम्मेदारी के तहत शमा बानो को राज्य में महिला कांग्रेस के संगठन विस्तार, महिला कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी तैयारियों को गति देने का दायित्व सौंपा गया है।कांग्रेस का फोकस इस बार महिला मतदाताओं को जोड़ने और महिला मुद्दों को मजबूती से उठाने पर है। शमा बानो को एक सक्रिय और संगठनात्मक अनुभव रखने वाली नेता माना जाता है, जिससे पार्टी को महिला मोर्चे को नए सिरे से खड़ा करने की उम्मीद है।

महिला मतदाताओं पर कांग्रेस की नजर

पश्चिम बंगाल की राजनीति में महिला मतदाताओं की भूमिका हमेशा से अहम रही है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि महिला संगठन को मजबूत किया जाए, तो इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। शमा बानो को इसी रणनीति के तहत आगे किया गया है।वे राज्यभर में महिला कांग्रेस की इकाइयों को सक्रिय करने, स्थानीय मुद्दों को सामने लाने और महिला नेतृत्व को उभारने का काम करेंगी। इससे कांग्रेस को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा होने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बंगाल की सियासत में राजस्थान के नेताओं की बढ़ती भूमिका

चुनाव से पहले ही भाजपा और कांग्रेस का बाड़मेर के नेताओं पर भरोसा जताना यह संकेत देता है कि पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार राजस्थान के नेताओं की भूमिका खास रहने वाली है। दोनों ही दल अपने-अपने तरीके से संगठन को मजबूत करने और चुनावी मैदान में बढ़त बनाने की कोशिश कर रहे हैं।आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाड़मेर के ये चेहरे पश्चिम बंगाल की राजनीति में कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं और उनकी रणनीति चुनावी नतीजों को किस हद तक प्रभावित करती है।