भरतपुर राजपरिवार में बढ़ा विवाद: महाराजा विश्वेंद्र सिंह का 13 फरवरी को मोती महल कूच
सिनसिना तोप वाली तस्वीर के बाद भरतपुर में हलचल, 13 फरवरी को मोती महल में टकराव के संकेत।
भरतपुर राजघराने का पुराना विवाद एक बार फिर गरमाता दिख रहा है। 31 जनवरी को सामने आई विश्वेंद्र सिंह की एक तस्वीर ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है। सिनसिना तोप के पास खड़े होकर महाराजा विश्वेंद्र सिंह ने अपनी ही पत्नी दिव्या सिंह और बेटे अनिरुद्ध सिंह को खुली चुनौती दे दी है। इसके साथ ही 13 फरवरी को मोती महल में आमने-सामने की स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है।
पांच साल से जारी कलह
भरतपुर का यह पारिवारिक विवाद पिछले पाँच वर्षों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस विवाद की शुरुआत रियासतकालीन ध्वज को लेकर हुए मतभेद से हुई थी। सितंबर 2025 में मोती महल पर ‘युद्ध भूमि’ का झंडा लगाया गया था, जिसका विभिन्न सामाजिक संगठनों ने विरोध किया। दबाव बढ़ने पर यह झंडा हटाया गया, लेकिन तब से पारंपरिक शाही ध्वज दोबारा नहीं लगाया गया है। महल की खाली छत अब भी इस विवाद की जड़ बनी हुई है और विश्वेंद्र सिंह इसे अपनी सम्मान और परंपरा से जुड़ा बड़ा मुद्दा मानते हैं।
संपत्ति और विरासत पर खींचतान
इस संघर्ष का दूसरा बड़ा कारण करोड़ों की पैतृक संपत्ति है। राजघराने की प्रॉपर्टी, कीमती स्वर्ण-आभूषण और एंटीक सामान का बड़ा संग्रह लंबे समय से परिवार के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। इन बेशकीमती वस्तुओं की कीमत अरबों में बताई जाती है, जिसके चलते यह मामला लगातार चर्चा में बना रहता है।
पति-पत्नी और बेटे के बीच वैचारिक टकराव
महाराजा विश्वेंद्र सिंह का आरोप है कि परिवार के बीच चल रहा विवाद खत्म होने के करीब था, लेकिन उनकी पत्नी और बेटे ने रियासतकालीन ध्वज न लगाने का निर्णय लेकर पूरे मामले को फिर से जटिल बना दिया। यही कारण है कि अब मामला राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है।
13 फरवरी को ‘शक्ति प्रदर्शन’ की संभावना
13 फरवरी को भरतपुर के महान शासक महाराजा सूरजमल की जयंती मनाई जाएगी। विश्वेंद्र सिंह इसी दिन मोती महल कूच कर शाही ध्वज लगाने का दावा कर रहे हैं। इस घोषणा के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि उस दिन बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने की संभावना है। यदि ऐसा हुआ, तो मोती महल का परिसर टकराव की स्थिति में बदल सकता है।