किसानों का 'बीमा ब्लैकमेल': हनुमान बेनीवाल ने शिवराज सिंह को खरी-खरी लिखी, भ्रष्टाचार पर जांच समिति और पारदर्शिता की मांग!

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों पर चिंता जताई।

Oct 14, 2025 - 14:03
किसानों का 'बीमा ब्लैकमेल': हनुमान बेनीवाल ने शिवराज सिंह को खरी-खरी लिखी, भ्रष्टाचार पर जांच समिति और पारदर्शिता की मांग!

जयपुर/नागौर, 14 अक्टूबर 2025: राजस्थान के नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने एक बार फिर किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में व्याप्त भ्रष्टाचार, तकनीकी खामियों और क्लेम भुगतान में देरी को लेकर उन्होंने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक तीखा पत्र लिखा है। बेनीवाल ने न केवल योजना के पोर्टल की 'गड़बड़ियों' पर सवाल उठाए, बल्कि उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने, क्लेम विवरण ग्राम पंचायत स्तर पर सार्वजनिक करने और लोकसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने की चेतावनी भी दी। यह पत्र किसानों के बीच आक्रोश का प्रतीक बन चुका है, जहां प्रीमियम तो समय पर जमा हो जाता है, लेकिन क्लेम की राशि 'गायब' हो जाती है।

योजना का 'अंधेरा': प्रीमियम ले लो, क्लेम भूल जाओ!

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, जो 2016 में शुरू हुई थी, का मकसद प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को आर्थिक ढाल प्रदान करना था। लेकिन बेनीवाल के पत्र के मुताबिक, नागौर संसदीय क्षेत्र सहित पूरे राजस्थान में यह योजना 'भ्रष्टाचार का अड्डा' बन चुकी है। किसान प्रीमियम जमा कर बीमा कराते हैं, लेकिन फसल खराब होने पर क्लेम का इंतजार लंबा खिंच जाता है। कई मामलों में पॉलिसी ही रद्द कर दी जाती है या नाममात्र की राशि मिलती है। बेनीवाल ने पत्र में स्पष्ट लिखा है: "कई किसानों ने शिकायत की है कि योजना के पोर्टल पर वे अपनी बीमा स्थिति ही नहीं देख पाते। क्या उनके नाम से किसी और ने बीमा करवाया है, इसका पता ही नहीं चलता।" स्थानीय स्तर पर दलालों और एजेंटों का 'शोषण तंत्र' भी बेनकाब किया गया। बेनीवाल के अनुसार, ये लोग किसानों को गुमराह कर आर्थिक ठगी करते हैं, जिससे योजना पर किसानों का भरोसा डगमगा रहा है। नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में तो हालात और भी खराब हैं, जहां पूर्ण फसल नुकसान के बावजूद किसानों को 'चवन्नी' के क्लेम मिले। यह स्थिति 'अत्यंत चिंताजनक' बताते हुए सांसद ने कहा कि इससे 'अन्नदाताओं' का सीधा नुकसान हो रहा है। 

मांगों का 'पंच': जांच, पारदर्शिता और त्वरित क्लेम!

बेनीवाल ने पत्र में ठोस कदमों की मांग की है, जो किसान आंदोलन को नई दिशा दे सकती है। मुख्य मांगे इस प्रकार हैं: 

मांग   विवरण

उच्च स्तरीय जांच समिति

योजना में अनियमितताओं की गहन जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जाए।

अधिकारियों से स्पष्टीकरण

नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले के संबंधित अधिकारियों से तत्काल जवाब लिया जाए।

पीड़ित किसानों को क्लेम

प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।

पोर्टल का सुधार

तकनीकी गड़बड़ियों का स्थायी समाधान; पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसान देख सकें कि उनके नाम से कितना क्लेम जारी हुआ और किस खाते में गया।

सार्वजनिक सूची

प्रत्येक बीमित किसान और क्लेम प्राप्तकर्ताओं की लिखित सूची ग्राम पंचायतों और जिला कृषि कार्यालयों पर चस्पा की जाए। बीमा कंपनियों को विशेष निर्देश जारी हों।

बेनीवाल ने अपील की कि "इस विषय में त्वरित संज्ञान लें और किसानों के हित में कार्यवाही करें।"

संसद में 'धमाका': शीतकालीन सत्र में बड़ा मुद्दा!

बेनीवाल ने साफ शब्दों में कहा कि लोकसभा के शीतकालीन सत्र (नवंबर 2025 से शुरू होने वाले) में वे इस मुद्दे को 'प्रमुखता से' उठाएंगे। इससे पहले जुलाई 2025 में भी उन्होंने संसद में PMFBY पर सवाल उठाए थे, जहां मंत्री चौहान ने क्लेम देरी पर 12% ब्याज की पेनल्टी का जिक्र किया था। लेकिन बेनीवाल का कहना है कि ये सुधार 'कागजी' हैं, जमीनी हकीकत अलग है। हाल ही में लोकसभा में चौहान ने बताया था कि देशभर में 5,405 करोड़ रुपये के क्लेम अटके हैं, जो राजस्थान जैसे राज्यों में भ्रष्टाचार की पुष्टि करता है। 

किसान संगठनों का समर्थन, सरकार पर दबाव!

RLP समर्थक और किसान संगठनों ने बेनीवाल के इस कदम का स्वागत किया है। नागौर के किसान नेता बनवारी शेषमा ने कहा, "बेनीवाल साहब किसानों के सच्चे सिपाही हैं। यह पत्र केंद्र को झकझोर देगा।" दूसरी ओर, भजनलाल शर्मा सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि राज्य स्तर पर क्लेम वितरण में देरी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र ने हाल ही में PMFBY में संशोधन किया है, जहां राज्य की देरी पर केंद्र किसानों को सीधे भुगतान करेगा और राज्य पर ब्याज लगेगा। लेकिन बेनीवाल का मानना है कि बिना पारदर्शिता के यह बदलाव बेमानी हैं।

यह पत्र न केवल राजस्थान के किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण है, बल्कि पूरे देश में PMFBY की समीक्षा की मांग को बल देगा। क्या मंत्री चौहान जल्द कार्रवाई करेंगे, या संसद में 'बवाल' होगा? आने वाले दिनों में इसका जवाब मिलेगा।