जयपुर की शान,महाराजा और महारानी कॉलेज की जमीन... क्या अब इतिहास बन जाएगी?सरकार के एक गुपचुप फैसले ने उड़ाए सबके होश! आखिर कौन है इस 'अवैध' खेल के पीछे?

क्या बिक जाएगी महाराजा-महारानी कॉलेज की विरासत? JDA और निगम के नाम जमीन होने से मचा भारी बवाल। पूरी खबर।

Feb 24, 2026 - 08:35
जयपुर की शान,महाराजा और महारानी कॉलेज की जमीन... क्या अब इतिहास बन जाएगी?सरकार के एक गुपचुप फैसले ने उड़ाए सबके होश! आखिर कौन है इस 'अवैध' खेल के पीछे?

जयपुर - राजस्थान की राजधानी जयपुर की ऐतिहासिक पहचान और शिक्षा जगत के दो बड़े स्तंभ महाराजा और महारानी कॉलेजइन दिनों एक गंभीर विवाद के केंद्र में हैं इन कॉलेजों की बेशकीमती जमीन को जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और नगर निगमके नाम हस्तांतरित करने के सरकारी फैसले ने केवल सियासी गलियारे में भूचाल ला दिया है,बल्कि छात्रों और शिक्षाविदों को भीसड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है सोमवार को राजस्थान विधानसभा में यह मुद्दा गरमाया रहा,जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष केकई विधायकों ने एक सुर में सरकार को आड़े हाथों लिया।

अवैध नामांतरण और धब्बे जैसे आरोप विधानसभा में तीखी बहस

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायक कालीचरण सराफ,कांग्रेस के मनीष यादव और आरएलडी के सुभाष गर्ग ने इसजमीन हस्तांतरण को पूरी तरह अवैध करार दिया विधायकों का कहना है कि महाराजा कॉलेज की करीब 48 बीघा और महारानीकॉलेज की लगभग 29 बीघा जमीन का नामांतरण चुपचाप जेडीए और नगर निगम के नाम कर दिया गया।

सुभाष गर्ग ने सदन में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए इसे प्रशासन के माथे पर एक 'धब्बा' बताया उन्होंने आरोप लगाया कि कुछअधिकारियों ने मिलीभगत कर इस ऐतिहासिक धरोहर की जमीन को हड़पने की कोशिश की है वहीं,मनीष यादव ने मांग की है किइस नामांतरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर जमीन वापस कॉलेजों के नाम की जाए विधायकों को डर है कि यदि जमीन इननिकायों के पास रही,तो भविष्य में इसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों या नीलामी के लिए किया जा सकता है,जिससे इनसंस्थानों की स्वायत्तता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

विकास की आड़ में विरासत से खिलवाड़? क्या है असली योजना

दरअसल,इस पूरे विवाद की जड़ में शहर का विकास ढांचा है जानकारी के अनुसार,सूचना केंद्र के सामने आरोग्य पथ को चौड़ा करनेऔर सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) में बन रहे आईपीडी टावर की पार्किंग के लिए जगह की तलाश की जा रही है जेडीए कीयोजना है कि महाराजा कॉलेज के ग्राउंड में भूमिगत पार्किंग बनाई जाए और आरोग्य पथ को 50 फीट से बढ़ाकर 100 फीट कियाजाए।

हालांकि,तकनीकी पेच यह है कि राजस्थान विश्वविद्यालय की सिंडिकेट की अनुमति के बिना विश्वविद्यालय की किसी भी संपत्ति काहस्तांतरण नहीं किया जा सकता। विश्वविद्यालय पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. सोमदेव ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले मेंसिंडिकेट को अंधेरे में रखा गया तो विश्वविद्यालय प्रशासन से कोई राय ली गई और ही उन्हें इस बारे में सूचित किया गया।

संभावित खतरे और भविष्य की राह

अगर यह जमीन कॉलेजों के हाथ से निकलती है,तो सबसे बड़ा नुकसान खेल मैदानों और शैक्षणिक वातावरण को होगा शिक्षाविदोंका मानना है कि ऐतिहासिक इमारतों के आसपास कंक्रीट का जाल बिछाने और पार्किंग बनाने से इनकी मूल पहचान खत्म होजाएगी फिलहाल, यह मामला राजभवन तक पहुंचने की तैयारी में है और सिंडिकेट की विशेष बैठक बुलाकर सरकार के इस फैसलेका कड़ा विरोध करने का प्रस्ताव पारित किया जा सकता है अब देखना यह होगा कि जनभावनाओं और राजनीतिक दबाव के बीचसरकार इस फैसले को वापस लेती है या विकास के नाम पर यह विवाद और गहराता है।