DNP के बाशिंदों का दर्द: "कंपनियों को जमीन, पर अपनों को सड़क-पानी भी नहीं", सदन में गरजे विधायक रविंद्र सिंह भाटी
DNP क्षेत्र में विकास ठप होने पर विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सदन में सरकार को घेरा और बुनियादी सुविधाओं की मांग की।
जयपुर/बाड़मेर। राजस्थान विधानसभा में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने पश्चिमी राजस्थान के डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) क्षेत्र में रह रहे हजारों परिवारों की बदहाली का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। भाटी ने सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि संरक्षण के नाम पर पिछले 45 सालों से स्थानीय लोगों का जीवन 'नर्क' बना दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन सीमांत गांवों से पलायन हुआ, तो यह भविष्य में देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
45 सालों से विकास पर लगा 'वन विभाग' का ग्रहण
विधायक भाटी ने सदन को याद दिलाया कि अगस्त 1980 में एक अधिसूचना के जरिए पश्चिमी राजस्थान के एक बड़े हिस्से को वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए DNP घोषित किया गया था। लेकिन इस फैसले ने इंसानों को विकास की दौड़ में दशकों पीछे धकेल दिया। भाटी ने कहा, "आज हालत यह है कि वहां सड़क निर्माण पर रोक है, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं और लोग प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सरकारी स्कीमों तक के लिए तरस रहे हैं।"
दोहरा मापदंड: कंपनियों को जमीन, किसानों को पाबंदी
भाटी ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार उद्योगों और मल्टीनेशनल कंपनियों को लाखों बीघा जमीन अलॉट कर रही है, वहीं दूसरी तरफ दशकों से वहां रह रहे किसानों को अपने खेत पर कृषि ऋण (KCC) तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "इन परिवारों का कुनबा तो बढ़ रहा है, लेकिन पाबंदियों की वजह से इनका भविष्य सिकुड़ता जा रहा है। क्या इन नागरिकों का अपना घर बनाने का हक नहीं है?"
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है मुद्दा
भाटी ने इस समस्या को केवल सामाजिक या आर्थिक ही नहीं, बल्कि 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा बताया। उन्होंने तर्क दिया कि DNP का एक बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास है। ये स्थानीय लोग दशकों से सीमा के 'प्राकृतिक प्रहरी' रहे हैं। यदि सुविधाओं के अभाव में यहां से पलायन हुआ और सीमांत गांव खाली हो गए, तो इससे हमारी सीमाओं की चौकसी कमजोर होगी।
संवेदनशीलता के बिना संरक्षण एक दंड है
विधायक ने कड़े शब्दों में कहा कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन अगर इसमें मानवीय संवेदना न हो, तो यह आम नागरिकों के लिए किसी सजा से कम नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि निर्माण और भूमि उपयोग से जुड़े कड़े नियमों में ढील दी जाए ताकि स्कूल, अस्पताल और इंटरनेट जैसी सुविधाएं इन गांवों तक पहुंच सकें।
भाटी ने अंत में सरकार से जल्द से जल्द संज्ञान लेने की अपील की, ताकि बॉर्डर पर बैठा व्यक्ति भी सम्मान के साथ देश की मुख्यधारा से जुड़ सके।