वेटर की नौकरी से NSUI के नेशनल प्रेसिडेंट तक: संघर्ष की मिसाल बने विनोद जाखड़, 2 बार टिकट कटा पर नहीं मानी हार

वेटर की नौकरी से NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने तक, जानें दलित छात्र नेता विनोद जाखड़ के बेमिसाल संघर्ष की पूरी कहानी।

Feb 20, 2026 - 15:14
वेटर की नौकरी से NSUI के नेशनल प्रेसिडेंट तक: संघर्ष की मिसाल बने विनोद जाखड़, 2 बार टिकट कटा पर नहीं मानी हार
विनोद जाखड़ और राहुल गांधी

जयपुर/नई दिल्ली। राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि बिना 'गॉडफादर' के आगे बढ़ना नामुमकिन है, लेकिन राजस्थान के एक साधारण परिवार से आने वाले विनोद जाखड़ ने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है। वेटर का काम करने से लेकर देश के सबसे बड़े छात्र संगठन NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।

जमीनी स्तर से शुरुआत

7 सितंबर 1994 को जयपुर की विराटनगर तहसील के मेड़ जोधुला गांव में जन्मे विनोद जाखड़ एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता पूर्ण मल जाखड़ पेशे से कारीगर थे। अक्सर उनके उपनाम 'जाखड़' के कारण लोग उन्हें जाट समुदाय का समझ लेते हैं, लेकिन विनोद दलित समाज (मेघवाल समुदाय) से आते हैं। उनकी सफलता आज करोड़ों वंचित युवाओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण है।

जब संगठन ने नकारा, तो छात्र शक्ति ने स्वीकारा

विनोद की राजनीतिक यात्रा संघर्षों की आग में तपकर निखरी है। साल 2014 में जब उन्होंने पहली बार राजस्थान कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए NSUI से टिकट मांगा, तो संगठन ने उन्हें मौका नहीं दिया। लेकिन विनोद पीछे नहीं हटे। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह पहली बार था जब राजस्थान कॉलेज में दलित समाज का कोई युवा अध्यक्ष बना।

वेटर का काम और स्वाभिमान की लड़ाई

2016 में उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी के मुख्य चुनाव के लिए फिर से दावेदारी पेश की, लेकिन पार्टी ने उन्हें 'और मेहनत' करने की सलाह देकर टाल दिया। आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि उन्हें अपना खर्च चलाने के लिए वेटर तक की नौकरी करनी पड़ी। लेकिन विनोद ने न तो अपनी पढ़ाई छोड़ी और न ही छात्रों के हक की लड़ाई।

2018 का वो ऐतिहासिक चुनाव

साल 2018 विनोद के जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। चार साल तक खून-पसीना बहाने के बाद भी जब NSUI ने उन्हें अध्यक्ष के बजाय महासचिव का टिकट देना चाहा, तो उन्होंने संगठन के पद को ठुकराकर अपने आत्मसम्मान को चुना। उन्होंने फिर से निर्दलीय ताल ठोंकी।

नतीजे चौंकाने वाले थे—विनोद जाखड़ को इतने वोट मिले कि उनके अकेले के मत ABVP और NSUI के कुल वोटों के योग से भी ज्यादा थे। राजस्थान यूनिवर्सिटी के इतिहास में वे पहले दलित छात्रसंघ अध्यक्ष बने।

राहुल गांधी और अशोक गहलोत का मिला साथ

इस प्रचंड जीत के बाद सूबे की राजनीति के दिग्गजों की नजर उन पर पड़ी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें लंच पर बुलाया और सचिन पायलट ने भी उनकी पीठ थपथपाई। अंततः राहुल गांधी की मौजूदगी में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली और अपनी मातृ संस्था NSUI में वापसी की।

संघर्ष का फल: अब संभालेंगे राष्ट्रीय कमान

आज विनोद जाखड़ की मेहनत और वफादारी का ही परिणाम है कि उन्हें NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष (नेशनल कैप्टन) नियुक्त किया गया है। उनकी यह नियुक्ति यह संदेश देती है कि यदि आपके इरादे मजबूत हों और आप धरातल पर काम करने वाले कार्यकर्ता हैं, तो कोई भी बाधा आपको आपके लक्ष्य तक पहुँचने से नहीं रोक सकती।

Mahaveer Sankhlecha I am a reporter dedicated to delivering accurate news and meaningful stories to the public.