संकट में 'अदृश्य' होने वालों पर वसुंधरा राजे का तंज, बाबा बागेश्वर से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी तपिश
वसुंधरा राजे ने पुष्कर में बाबा बागेश्वर से की मुलाकात। हनुमान जी का उदाहरण दे कहा- मुश्किल वक्त में साथ छोड़ने वाले बहुत हैं।
वक्त आने पर 'अदृश्य' हो जाते हैं लोग: वसुंधरा राजे का छलका दर्द, बाबा बागेश्वर से मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में हलचल
अजमेर/पुष्कर: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इन दिनों धार्मिक यात्राओं और आध्यात्मिक मेल-मुलाकातों को लेकर चर्चा में हैं। सोमवार को पुष्कर में राजे ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर) से करीब एक घंटे तक बंद कमरे में मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजस्थान की राजनीति में कयासों का दौर शुरू हो गया है।
हनुमान जी के समर्पण का दिया हवाला
इससे पूर्व, किशनगढ़ में 41 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम के दौरान वसुंधरा राजे का एक बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। राजे ने भक्ति और शक्ति के संगम पर बात करते हुए कहा कि आज के दौर में हनुमान जी जैसा समर्पण मिलना दुर्लभ है।
उन्होंने कहा, "हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि अपने स्वामी और राह दिखाने वाले के साथ हमेशा खड़े रहो। सुख में तो हर कोई साथ होता है, लेकिन असली परीक्षा दुख में होती है। आज के समय में अधिकतर लोग सुख के साथी हैं, मुसीबत आते ही वे 'अदृश्य' हो जाते हैं।"
राजनीतिक गलियारों में 'ढाल' वाले बयान के मायने
राजे के इस बयान को सीधे तौर पर वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिनका चरित्र हनुमान जी की तरह अडिग होता है, उनका नाम इतिहास में दर्ज होता है। सुंदरकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्ठा और कर्म ही व्यक्ति की असली पहचान है।
बाबा बागेश्वर से मुलाकात और सामूहिक विवाह की चर्चा
पुष्कर में बाबा बागेश्वर के साथ हुई मुलाकात ने रणनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही बाबा बागेश्वर द्वारा आयोजित भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन की काफी चर्चा रही थी। उस दौरान कई वीवीआईपी (VVIP) हस्तियों के पहुंचने की खबरें थीं, लेकिन कई लोग शामिल नहीं हो पाए थे। ऐसे में राजे का खुद चलकर बाबा से मिलने पहुंचना, प्रदेश की सियासत में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।