निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 40 हजार बसों का संचालन ठप

राजस्थान में निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल से 40 हजार बसें ठप, लाखों यात्रियों की यात्रा पर असर।

Feb 24, 2026 - 07:49
निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 40 हजार बसों का संचालन ठप

राजस्थान में निजी बस संचालकों ने परिवहन विभाग की कार्रवाई के विरोध में सोमवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल के साथ ही प्रदेशभर में करीब 40 हजार निजी बसें सड़कों पर रोक दी गईं है। इसका सीधा असर रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों पर पड़ रहा है। अचानक राजस्थान सरकार और निजी बस ऑपरेटर्स के साथ हुई उस हाथापाई से आवागमन ठप्प होने की संभावना है। एसे में यदि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक प्रयास नहीं किए जाते है तो इससे प्रदेशवासियों को भयंकर मुसीबतों का भी सामना करना पड़ सकता है।

किन रूटों पर रहेगा सबसे ज्यादा असर ?

इस बंद का सबसे अधिक असर राजधानी जयपुर सहित उससे जुड़े महत्वपूर्ण केन्द्रों पर देखने को मिलेगा। राजस्थान के प्रमुख शहरों को आपस में जोड़ने बस सेवा के ठप्प होने से यात्रीयों को भी अतिरिक्त परेशानियाँ उठानी पड़ेगी। इसमें सबसे अधिक असर राजधानी जयपुर से जोधपुर, उदयपुर, कोटा और बीकानेर जाने वाले रास्तों पर दिखेगा। इसके साथ ही इंदौर और अहमदाबाद के लिए चलने वाली स्लीपर बसें भी पूरी तरह बंद हो गईं है जिससे यह संकट अधिक गंभीर बन गया है। जयपुर से रोजाना करीब 25 हजार यात्री ऑनलाइन टिकट बुक कराते हैं, लेकिन बस ऑपरेटरों ने 23 से 28 फरवरी तक की बुकिंग पहले ही रोक दी थी।

स्टेज कैरिज बसों का संचालन भी रुका

स्टेज कैरिज की लगभग 30 हजार बसें भी मंगलवार से बंद कर दी गईं, जिससे जिलों और कस्बों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को और अधिक परेशानी झेलनी पड़ी। हड़ताल की घोषणा के बाद सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही है लेकिन अब आज यानि मंगलवार को एक और बैठक प्रस्तावित है। ऑपरेटरों की शिकायत है कि ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन के अनुसार परिवहन विभाग पुराने वाहनों पर नए मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधान लागू कर भारी जुर्माना वसूल रहा है। जिसके तहत एक बस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान कई बार बसों को रास्ते में रोककर यात्रियों को उतरवा दिया जाता है, जिससे खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को रात में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

यात्रियों के लिए नहीं बनी वैकल्पिक व्यवस्था

ऑपरेटरों द्वारा पहले ही हड़ताल की चेतावनी देने के बावजूद सरकार की ओर से यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था तैयार नहीं की गई। इधर रोडवेज की सिर्फ करीब 3 हजार बसें ही उपलब्ध हैं, जिससे उन पर अचानक यात्रियों का दबाव बढ़ गया है। लंबी दूरी के यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फ़िलहाल सबकी नज़रें सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच मंगलवार को होने वाली वार्ता पर टिकी हुई हैं। यदि बातचीत सफल नहीं होती है तो यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।