जालोर: आंजना चौधरी समाज ने महिलाओं के स्मार्टफोन बैन का फैसला लिया वापस

जालोर के आंजना चौधरी समाज ने विवाद और विरोध के बाद महिलाओं के स्मार्टफोन बैन का प्रस्ताव पूरी तरह निरस्त किया।

Dec 25, 2025 - 14:46
जालोर: आंजना चौधरी समाज ने महिलाओं के स्मार्टफोन बैन का फैसला लिया वापस

राजस्थान के जालोर जिले में सुंधा माता पट्टी के आंजना चौधरी समाज द्वारा महिलाओं और बच्चियों के लिए कैमरे वाले स्मार्टफोन पर लगाए गए प्रतिबंध को आखिरकार वापस ले लिया गया है। 21 दिसंबर को पारित यह प्रस्ताव विवादों में आने और व्यापक विरोध के बाद निरस्त कर दिया गया। समाज के अध्यक्ष सुजानाराम चौधरी और वरिष्ठ सदस्यों ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी तरह का बैन लागू नहीं रहेगा और समाज के लोग अपने विवेक से निर्णय ले सकेंगे।

दरअसल, 21 दिसंबर को गजीपुर गांव में समाज की एक बड़ी बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में 15 से 24 गांवों की बहू-बेटियों और युवतियों के लिए स्मार्टफोन उपयोग पर रोक लगाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। प्रस्ताव के अनुसार 26 जनवरी 2026 से महिलाओं को केवल की-पैड वाले साधारण मोबाइल फोन रखने की अनुमति दी जानी थी। सार्वजनिक कार्यक्रमों, शादियों या पड़ोस में जाते समय भी स्मार्टफोन ले जाने पर पाबंदी तय की गई थी। पढ़ाई करने वाली छात्राओं को घर के भीतर सीमित उपयोग की छूट दी गई थी।

समाज के बुजुर्गों का तर्क था कि स्मार्टफोन के कारण छोटे बच्चे मोबाइल की लत का शिकार हो रहे हैं। स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से बच्चों की आंखों पर असर पड़ रहा है और वे गेमिंग व सोशल मीडिया में उलझ जाते हैं। इसके साथ ही साइबर अपराध और अनुशासनहीनता जैसी समस्याओं की भी बात कही गई थी।

हालांकि, जैसे ही यह फैसला सामने आया, सोशल मीडिया और मुख्यधारा के मीडिया में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे महिलाओं की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा। महिलाओं और युवतियों ने वीडियो कॉल, सुरक्षा ऐप्स और आपात स्थिति में स्मार्टफोन की जरूरत का सवाल उठाया। बढ़ते विवाद के बाद समाज के प्रबुद्ध लोगों ने दोबारा बैठक कर इस पर पुनर्विचार किया।

समाज के अग्रणी नथाराम चौधरी ने बताया कि प्रस्ताव का मकसद महिलाओं पर रोक लगाना नहीं था, बल्कि बच्चों को मोबाइल की लत और साइबर जोखिम से बचाना था। लेकिन गलतफहमी और विवाद बढ़ने के चलते समाज की एकता को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव को पूरी तरह रद्द कर दिया गया। अब समाज में किसी भी तरह का स्मार्टफोन प्रतिबंध लागू नहीं रहेगा।