राजस्थान में हवा फिर जहरीली, कई शहरों में AQI 300 पार, स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा
राजस्थान में धुंध और बादलों के कारण प्रदूषण बढ़ा। कई शहरों में AQI 300 पार, सांस रोगियों को खतरा।
राजस्थान में एक बार फिर वायु प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। लगातार बादल छाए रहने और धुंध की वजह से प्रदेश के कई शहरों की हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। बीते कुछ दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में हल्का सुधार देखा गया था, लेकिन अब हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्थिति खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है।
कई शहरों में खतरनाक स्तर पर पहुंचा AQI
प्रदेश के औद्योगिक और शहरी इलाकों में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। भिवाड़ी में AQI 346 दर्ज किया गया, जबकि वसुंधरा नगर स्टेशन पर यह 364 तक पहुंच गया, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। बीकानेर में भी हवा की गुणवत्ता खराब रही और AQI 302 रिकॉर्ड किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, 300 से ऊपर का स्तर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा माना जाता है और इससे सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
जयपुर की हवा भी बनी जहरीली
राजधानी जयपुर में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। शहर का औसत AQI 247 दर्ज किया गया है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। मानसरोवर और सीतापुर इंडस्ट्रियल एरिया में यह स्तर 299 तक पहुंच गया। इसके अलावा टोंक में AQI 289, सीकर में 257, झुंझुनूं में 208, चूरू में 224 और नागौर में 229 दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश के बड़े हिस्से में हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है।
धुंध और बादलों से बढ़ी समस्या
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार बादल छाए रहने और धुंध के कारण हवा में मौजूद प्रदूषक कण नीचे ही फंसे हुए हैं। हवा की रफ्तार कम होने से ये कण फैल नहीं पा रहे, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। खासकर सुबह और रात के समय धुंध ज्यादा घनी होने से दृश्यता भी कम हो रही है और सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं।
बारिश से मिल सकती है राहत
हालांकि, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में जयपुर, भरतपुर, जोधपुर, बीकानेर और शेखावाटी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। बारिश होने पर हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण जमीन पर बैठ जाते हैं, जिससे AQI में गिरावट आने की उम्मीद रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अच्छी बारिश होती है तो प्रदेश को कुछ राहत मिल सकती है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरा
खराब हवा का असर सबसे ज्यादा बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मौसम में सुबह की सैर से बचना चाहिए, क्योंकि उस समय प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है। बाहर निकलते समय मास्क या कपड़े से मुंह ढकना जरूरी है ताकि हानिकारक कणों का असर कम हो सके।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रदूषण के इस दौर में लोग घर के अंदर ही रहें, खासकर जब AQI बहुत खराब श्रेणी में हो। बच्चों को खुले में खेलने से रोकें और बुजुर्गों की सेहत पर विशेष ध्यान दें। पर्याप्त पानी पीना और घर के अंदर हवा को साफ रखने के उपाय अपनाना भी जरूरी है।कुल मिलाकर, राजस्थान में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है। जब तक मौसम में बदलाव नहीं आता, तब तक सावधानी बरतना ही सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है।