राजस्थान भर्ती परीक्षाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा, तकनीकी प्रमुख सहित 5 गिरफ्तार
राजस्थान भर्ती परीक्षाओं में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ का खुलासा, तकनीकी प्रमुख समेत 5 आरोपी SOG की गिरफ्त में
राजस्थान में सरकारी भर्तियों की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सुपरवाईजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा-2018, प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा-2018 और कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा-2018 में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस गंभीर प्रकरण में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख सहित कुल पांच अभियुक्तों को स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने गिरफ्तार किया है।
तीन बड़ी भर्तियां, लाखों अभ्यर्थी
इन तीनों भर्ती परीक्षाओं के माध्यम से कुल 3212 पदों को भरा जाना था। इसके लिए करीब 9 लाख 40 हजार 38 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षाओं का आयोजन वर्ष 2019 में किया गया था। परीक्षा परिणाम तैयार करने के लिए ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग और डाटा प्रोसेसिंग का गोपनीय कार्य एक आउटसोर्स फर्म को सौंपा गया था।
ओएमआर स्कैनिंग में की गई हेराफेरी
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस श्री विशाल बंसल के अनुसार, जांच में सामने आया कि आउटसोर्स फर्म के कुछ कर्मचारियों ने ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग के बाद कंप्यूटर सिस्टम में वास्तविक डाटा से छेड़छाड़ की। चुनिंदा अभ्यर्थियों के अंकों में जानबूझकर अनुचित बढ़ोतरी की गई, जिससे अयोग्य उम्मीदवारों को भी चयनित करा दिया गया।
पुनः स्कैनिंग में उजागर हुई सच्चाई
जब राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को परीक्षा परिणामों में संदेह हुआ, तो मूल ओएमआर शीट्स की दोबारा स्कैनिंग करवाई गई। इस दौरान परीक्षा परिणामों में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। कई अभ्यर्थियों के अंक वास्तविक प्रदर्शन से कहीं अधिक पाए गए, जिससे पूरे चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे।
तकनीकी प्रमुख की अहम भूमिका
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बोर्ड में पदस्थ तत्कालीन सिस्टम एनालिस्ट-कम-प्रोग्रामर और तकनीकी प्रमुख श्री संजय माथुर इस पूरे षड्यंत्र में सक्रिय रूप से शामिल थे। वे ओएमआर स्कैनिंग और परीक्षा परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के प्रभारी थे। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए स्कैनिंग टीम और आउटसोर्स फर्म के कर्मचारियों से मिलीभगत की।
फोटोशॉप से बदले गए उत्तर
एसओजी की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि ओएमआर शीट्स की स्कैन कॉपी में फोटोशॉप सॉफ्टवेयर के जरिए सही उत्तर भर दिए गए। इससे अभ्यर्थियों के अंक अचानक बहुत अधिक बढ़ गए। उदाहरण के तौर पर, एक अभियुक्त को वास्तविक रूप से लगभग 63 अंक मिलने चाहिए थे, लेकिन फर्जीवाड़े के जरिए उसे 182 अंक दिखा दिए गए।
अन्य अभ्यर्थियों के साथ भी खेल
जांच में यह भी पता चला कि केवल एक-दो नहीं, बल्कि कई अभ्यर्थियों के साथ इसी तरह का खेल किया गया। जिनके वास्तविक अंक 30 से 50 के बीच थे, उन्हें 185 से अधिक अंक दिखाकर चयनित सूची में शामिल कर दिया गया। इससे योग्य उम्मीदवारों के साथ गंभीर अन्याय हुआ।
एसओजी की सख्त कार्रवाई
एसओजी ने इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए तकनीकी प्रमुख सहित कुल पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की गहन जांच जारी है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आ सकते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रेंडिंग
इस पूरे मामले ने राजस्थान की सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता और विद्यार्थियों में रोष इस कदर व्याप्त है कि यह मामला सामने आते ही एक्स पर ट्रेंडिंग में आ गया है। लाखों युवाओं की मेहनत के साथ हुए इस फर्जीवाड़े से आम जनता में रोष है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दोषियों को कितनी सख्त सजा मिलती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।