राजस्थान में OMR शीट घोटाला: भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा संकट
राजस्थान में OMR शीट घोटाले का पर्दाफाश, SOG की कार्रवाई से भर्ती परीक्षाओं पर उठे गंभीर सवाल
राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। OMR शीट में हेरफेर के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं, लेकिन अब राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड से जुड़े एक कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। जाँच एजेंसी SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने इस पूरे प्रकरण में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ा है।
OMR शीट घोटाले का खुलासा
SOG की जाँच में सामने आया है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अंदर से ही OMR शीट भरने और बदलने का खेल चल रहा था। जेईएन भर्ती परीक्षा 2021 और महिला सुपरवाइजर भर्ती को लेकर SOG ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इन एफआईआर में करीब 38 लोगों को नामजद किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों की सूची में बोर्ड का एक सुरक्षा गार्ड भी शामिल है, जिससे साफ होता है कि यह काम योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा था।
परीक्षा के दिन ही किया गया बड़ा खेल
एफआईआर के अनुसार, परीक्षा के दिन कुछ अभ्यर्थियों की OMR शीट जानबूझकर खाली छोड़ी गईं। बाद में मोटी रकम लेकर उन शीटों को भरने के आरोप लगाए गए हैं। यह पूरा खेल किसी एक व्यक्ति के बूते संभव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है।
उठते अहम सवाल
इस घोटाले के सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- किन-किन भर्तियों में इस कर्मचारी की भूमिका रही?
- इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं?
- क्या इसमें बड़े अधिकारी या प्रभावशाली लोग भी संलिप्त हैं?
- भ्रष्ट तरीके से नौकरी पाने वाले क्या कानून के दायरे में आएँगे?
- जिन ईमानदार युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ, क्या उन्हें कभी न्याय मिल पाएगा?
इन सवालों के जवाब अब SOG की जाँच से ही सामने आने की उम्मीद की जा रही है।
पारदर्शिता के लिए हरियाणा मॉडल की चर्चा
OMR शीट में हेरफेर के आरोपों से बचने के लिए विशेषज्ञ हरियाणा मॉडल को अपनाने की बात कर रहे हैं। इस व्यवस्था में OMR शीट के साथ दो कार्बन कॉपियाँ होती हैं। एक परीक्षार्थी को दी जाती है और दूसरी परीक्षा केंद्र पर सुरक्षित रखी जाती है। इससे भविष्य में किसी भी शिकायत की स्थिति में तीनों कॉपियों का मिलान कर सच्चाई सामने लाई जा सकती है। यदि इस प्रक्रिया के साथ वीडियोग्राफी और सील-पैक व्यवस्था अनिवार्य कर दी जाए, तो पारदर्शिता काफी बढ़ सकती है।
बोर्ड और सरकार की जवाबदेही
इस पूरे मामले में बोर्ड अध्यक्ष की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर एक ही संस्था में इतना बड़ा खेल चलता रहा और इसकी जानकारी शीर्ष स्तर तक क्यों नहीं पहुँची? साथ ही, RPSC जैसी संस्थाओं में भी ऐसी आशंकाओं को लेकर छात्रों के बीच भरोसा कैसे बहाल किया जाएगा, यह भी एक बड़ा मुद्दा है।
सरकार और जाँच एजेंसियों से उम्मीद
पिछले कई दिनों से विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरता रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा जाँच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने की छूट देना एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। जनता की अपेक्षा है कि इस मामले में किसी भी दोषी को, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, बख्शा न जाए।
भविष्य के लिए सबक
OMR शीट घोटाला सिर्फ एक भर्ती परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह लाखों युवाओं के भरोसे से जुड़ा प्रश्न है। यदि जाँच निष्पक्ष और पूरी गंभीरता से आगे बढ़ती है, तो यह भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक मजबूत संदेश साबित हो सकता है।