राजस्थान पंचायती राज चुनाव: मार्च-अप्रैल में संभावित मतदान, पहले पंच-सरपंच फिर ऊपरी स्तर के चुनाव!
राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव जल्द कराए जाने की तैयारी चल रही है। पहले चरण में पंच और सरपंच के चुनाव मार्च 2026 में (अधिसूचना 1 मार्च के आसपास, मतदान 20 मार्च तक) बैलेट पेपर से होंगे।
जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अब जल्द ही कराए जाने की उम्मीद जगी है। राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पंच और सरपंच के चुनाव पहले कराए जाएंगे, जबकि पंचायत समिति (प्रधान) और जिला परिषद के चुनाव इसके बाद अप्रैल महीने में हो सकते हैं। कुल 14,781 ग्राम पंचायतों (नव गठित सहित) में चुनाव कराने के लिए राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी है।
चुनावी समय-सारिणी की संभावना
पंच-सरपंच चुनाव की अधिसूचना: 1 मार्च के आसपास जारी हो सकती है।
मतदान: 20 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य।
पंचायत समिति (437) और जिला परिषद (41) के चुनाव: अप्रैल में।
मतदान तरीका: पंच-सरपंच स्तर पर बैलेट पेपर (मतपत्र) से।
सूत्र बताते हैं कि सभी स्तर के चुनाव एक साथ कराने पर अभी संशय बना हुआ है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से प्रक्रिया अपनाई जा रही है। आयोग की प्राथमिकता पहले ग्राम पंचायत स्तर के चुनाव कराने की है, ताकि 15 दिनों में यह प्रक्रिया पूरी हो सके।
मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू
1 जनवरी: मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी।
1 फरवरी के आसपास: प्रारूप प्रकाशन।
1 मार्च: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन।
इस प्रक्रिया से नए जुड़े, कटे या शिफ्ट हुए मतदाताओं की जानकारी स्पष्ट होगी। ओबीसी आरक्षण के लिए आयोग संबंधित डेटा का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। सूत्रों का कहना है कि जनवरी अंत तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, फिर सरकार का पत्र आयोग को भेजा जाएगा।
प्रशासकों की व्यवस्था और सरपंचों की मांग
राज्य में करीब 11 हजार ग्राम पंचायतों में मौजूदा सरपंचों को प्रशासक बनाया गया है। पूर्व सदस्यों को प्रशासनिक कमेटी की जिम्मेदारी दी गई है। यह नया पैटर्न अपनाया गया है, पहले ग्राम सचिव प्रशासक होते थे। सरपंच संघ राजस्थान के प्रवक्ता रफीक पठान ने कहा, "चुनाव जल्द कराना स्वागतयोग्य है। निर्वाचित सरपंचों को काम करने का मौका मिलेगा और रुके हुए विकास फंड जारी होंगे।"
कई पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा
राज्य में 222 पंचायत समितियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। उदयपुर, टोंक, सीकर, राजसमंद सहित 21 जिलों में जिला परिषदों में कलेक्टरों को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
जनगणना और SIR से कोई असर नहीं
आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि मैनपावर की कमी नहीं है और राज्य सरकार से बात हो चुकी है। जनगणना का पहला चरण अप्रैल 2026 से शुरू होगा, जबकि SIR की फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी को प्रकाशित हुई है। इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है और जल्द ही चुनावी गतिविधियां तेज होंगी। ग्रामीण राजस्थान में सियासी सरगर्मी बढ़ने लगी है, क्योंकि निर्वाचित प्रतिनिधियों की वापसी से विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।