राजस्थान में अब ACS और सेक्रेटरी खुद उठाएंगे आपका फोन, सीएम के आदेश पर 181 हेल्पलाइन पर बैठेंगे 35 कद्दावर IAS
राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: 4 मार्च से 28 अप्रैल तक 35 सीनियर IAS अफसर 181 हेल्पलाइन पर सुनेंगे जनता की फरियाद।
आम जनता के लिए खुशखबरी: सचिवालय में अब बड़े अफसर सुनेंगे आपकी समस्या, पेंडिंग शिकायतों पर एक्शन की तैयारी
जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश की नौकरशाही में एक अभूतपूर्व बदलाव की शुरुआत की है। अक्सर एयरकंडीशन कमरों और फाइलों के बीच रहने वाले राज्य के सबसे वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी अब सीधे आम जनता से रूबरू होंगे। शासन सचिवालय में स्थित '181 हेल्पलाइन' कॉल सेंटर पर अब प्रदेश के 35 वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं, तैनात किए गए हैं।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवासन द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, यह मुहिम 4 मार्च से शुरू होकर 28 अप्रैल तक चलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र में अटकी हुई आमजन की शिकायतों का त्वरित निस्तारण करना है।
क्यों लेना पड़ा यह फैसला?
दरअसल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पिछले कुछ समय से लगातार जनसुनवाई और 181 कॉल सेंटर का औचक निरीक्षण कर रहे थे। इस दौरान यह बात सामने आई कि बिजली, पानी, सफाई और प्रमाण पत्रों जैसी छोटी-छोटी समस्याएं भी महीनों तक पोर्टल पर पेंडिंग रहती हैं। निचले स्तर के अधिकारियों की ढिलाई से नाराज सरकार ने अब कमान सीधे टॉप लेवल के अफसरों को सौंप दी है।
हर अफसर को रिसीव करनी होंगी कम से कम 10 कॉल
नए आदेशों के मुताबिक, इन 35 सीनियर अफसरों की अलग-अलग दिन ड्यूटी लगाई गई है। प्रत्येक अधिकारी को अपनी ड्यूटी के दौरान कम से कम 10 कॉल अटेंड करने होंगे। वे न केवल लोगों की शिकायतें सुनेंगे, बल्कि मौके पर ही उनका समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
अभियान की मुख्य बातें:
समयावधि: 4 मार्च से 28 अप्रैल तक।
दिग्गज अफसरों की ड्यूटी: अभय कुमार सिंह, अपर्णा अरोड़ा, शिखर अग्रवाल, संदीप वर्मा और कुलदीप रांका जैसे नामचीन अधिकारी भी कॉल सेंटर पर बैठेंगे।
टारगेट: हर विजिट के दौरान कम से कम 10 ऐसी पेंडेंसी खत्म करनी होगी जो लंबे समय से अटकी हुई हैं।
सिर्फ कॉल नहीं, रिपोर्ट भी देनी होगी
यह अभियान केवल कॉल सुनने तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि हर विजिट के बाद संबंधित अधिकारी को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में यह बताना होगा कि उन्होंने कितनी शिकायतों का निपटारा किया और राजस्थान संपर्क पोर्टल की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए उनके पास क्या सुझाव हैं।
आम आदमी को क्या होगा फायदा?
अक्सर देखा जाता है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारी सुनवाई नहीं करते। अब जब शासन सचिवालय से ACS या सेक्रेटरी रैंक का अधिकारी सीधे पीड़ित से बात करेगा, तो विभाग के निचले अमले पर भी दबाव बढ़ेगा। इससे उन शिकायतों का समाधान जल्द होने की उम्मीद है जो बजट या नीतिगत कारणों के बजाय सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की वजह से पेंडिंग हैं।