राजस्थान विधानसभा में गूंजा बेटियों के घर से भागने का मुद्दा, विधायक नरेंद्र बुडानिया ने जताई चिंता
बजट सत्र में विधायक नरेंद्र बुडानिया ने लड़कियों के घर से भागने की बढ़ती घटनाओं को समाज के लिए गंभीर चेतावनी बताया।
राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान तारानगर विधायक नरेंद्र बुडानिया ने एक अजीबो ग़रीब मुद्दा उठाते हुए उस पर बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की है। राजस्थान में बीते कुछ वर्षों से प्रेम विवाहों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इन सब विषयों को ध्यान रखते हुए विधायक नरेंद्र बुडानिया ने प्रदेश में लड़कियों के घर से भागने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए इसे समाज के लिए शर्मनाक और चेतावनी देने वाला बताया।
समाज में फ़ैल रहा भय का वातावरण
विधायक नरेंद्र बुडानिया ने कहा कि आज प्रदेश का लगभग हर माता-पिता, खासकर बेटियों को लेकर भय और तनाव में जी रहा है। उन्होंने सदन में कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि माता-पिता रात में चैन से सो भी नहीं पा रहे हैं। हजारों लड़कियां घर छोड़कर चली जा रही हैं और यह सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। बुडानिया ने यह भी कहा कि अब तो चार-पांच बच्चों की मां तक घर से भागने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो समाज की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
पुलिस के सामने भी पहचान से इनकार
विधायक ने सदन में कुछ ऐसे उदाहरण रखे, जिन्होंने सभी को झकझोर दिया। उन्होंने बताया कि कई मामलों में जब पुलिस लड़कियों को ढूंढकर उनके माता-पिता के पास लाती है तो बेटियां अपने ही मां-बाप को पहचानने से इनकार कर देती हैं। एक बेटी का अपने माता-पिता को न पहचानने का बयान पूरे परिवार को अंदर से तोड़ देता है और जीवन भर का दर्द दे जाता है।
आत्महत्या तक पहुंच रहा दर्द
बुडानिया ने कहा कि इन घटनाओं का असर केवल परिवार तक सीमित नहीं रहता। कई बार पिता गहरे सदमे में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। कुछ ट्रेन के आगे कूद जाते हैं तो कुछ कुएं में छलांग लगा देते हैं। ऐसे मामलों में माता-पिता समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रह जाते और पूरी तरह टूट जाते हैं।
सत्ता और विपक्ष से मिलकर समाधान की अपील
विधायक ने स्पष्ट किया कि यह केवल कानून या अदालत का मामला नहीं है। चाहे केंद्र सरकार के नियम हों या सुप्रीम कोर्ट की कोई रुलिंग, लेकिन राजस्थान के स्तर पर सत्ता और विपक्ष दोनों को मिलकर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। उन्होंने सदन से आग्रह किया कि मिलकर ऐसा ठोस समाधान निकाला जाए, जिससे लड़कियों के घर से भागने की घटनाओं पर रोक लग सके और परिवार सुरक्षित रह सकें।