बुर्का नहीं शक्ति स्वरूप बेटियां बनें शास्त्री के बयान पर विधायक और तारातरा मठ के महंत प्रतापपुरी का समर्थन

पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बुर्का संबंधी बयान को विधायक और तारातरा मठ के महंत प्रतापपुरी का समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि बेटियों को शक्ति स्वरूप मानकर सम्मान और संस्कार के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। शिक्षा को केवल कमाई का साधन नहीं, बल्कि जीवन निर्माण का माध्यम बताया गया।

Jan 27, 2026 - 09:34
बुर्का नहीं शक्ति स्वरूप बेटियां बनें शास्त्री के बयान पर विधायक और तारातरा मठ के महंत प्रतापपुरी का समर्थन

धार्मिक और सामाजिक विमर्श के बीच पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बुर्का संबंधी बयान को लेकर सियासी और संत समाज की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इस बयान का समर्थन करते हुए विधायक तथा तारातरा मठ के महंत प्रतापपुरी ने स्पष्ट कहा कि बेटियों को किसी भी प्रकार के तिरस्कार की दृष्टि से नहीं, बल्कि शक्ति स्वरूप मानकर देखा जाना चाहिए।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान में कहा था कि बेटियों को “लव जिहाद” से बचाने के लिए उन्हें बुर्का पहनाने की बजाय मां दुर्गा जैसी शक्ति का स्वरूप बनाया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रों में सरस्वती, दुर्गा और अन्नपूर्णा जैसे नारी शक्ति के स्वरूपों का वर्णन है। “जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं”—यह भावना भारतीय संस्कृति की आत्मा है। इसलिए बेटियों को सम्मान, संस्कार और आत्मबल के साथ आगे बढ़ने का अवसर दिया जाना चाहिए।

इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए महंत प्रतापपुरी ने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बिल्कुल सही बात कही है। भारत की नारी सदियों से शक्ति, संस्कार और संस्कृति की वाहक रही है और आगे भी उसे उसी स्वरूप में स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज में अशांति और भ्रम का वातावरण बनाना चाहते हैं, लेकिन भारत की परंपरा मातृशक्ति पर आधारित रही है। हमें उसी परंपरा के अनुरूप सामाजिक वातावरण का निर्माण करना होगा।

विधायक ने शिक्षा के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केवल अर्थ उपार्जन ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है। शिक्षा जीवन जीने की कला सिखाती है और व्यक्ति के आचरण को गढ़ती है। गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय” का संदेश देने वाली शिक्षा ही सच्ची शिक्षा है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।

महंत प्रतापपुरी ने बाबा रामदेव द्वारा स्थापित गुरुकुलों की सराहना करते हुए कहा कि वहां हजारों बहन-बेटियां शिक्षा और संस्कार दोनों के साथ आगे बढ़ रही हैं, जो पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने बताया कि आदर्श विद्या मंदिरों और आवासीय वेद विद्यालयों के माध्यम से भी लाखों विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण का कार्य हो रहा है। इस दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा आवासीय वेद विद्यालय की शुरुआत को उन्होंने एक महत्वपूर्ण कदम बताया।