कमीशन का काला कारोबार: विधायकों से अफसरों तक
राजस्थान में विधायक निधि (MLA LAD फंड) के बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। तीन विधायकों - भाजपा के रेवंतराम डांगा (खींवसर), कांग्रेस की अनीता जाटव (हिंडौन) और निर्दलीय ऋतु बनावत (बयाना) - ने 40-50% कमीशन मांगकर काम देने की डील की। इसके बाद सरकारी अधिकारी भी 5-10% कमीशन लेकर वर्क ऑर्डर और पेमेंट प्रोसेस करने को तैयार हुए। कुल 1.70 करोड़ की डील में जनता के 70% पैसे कमीशन व मुनाफे में जाते हैं,
राजस्थान की राजनीति और प्रशासन में कमीशनखोरी का घिनौना खेल अब खुलकर सामने आ गया है। दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग ने पहले विधायकों की पोल खोली थी, और अब इस भ्रष्ट सिस्टम में शामिल अफसरों को भी बेनकाब कर दिया है। विधायक निधि के करोड़ों रुपये जनता की भलाई के बजाय कमीशन की भेंट चढ़ रहे हैं। 14 दिसंबर को भास्कर ने खुलासा किया कि विधायक निधि का 40 प्रतिशत हिस्सा कमीशन में बंटता है, लेकिन यह खेल सिर्फ विधायकों तक सीमित नहीं। सरकारी अधिकारी भी 10 प्रतिशत कमीशन लेकर ही वर्क ऑर्डर जारी करते हैं और पेमेंट प्रोसेस करते हैं। स्टिंग ऑपरेशन में कैमरे पर कैद हुए ये अधिकारी अपने हिस्से की 'डील' फाइनल करते नजर आए।
विधायकों की कमीशनखोरी: स्टिंग में तीन विधायकों का असली चेहरा बेनकाब
भास्कर की टीम ने इस घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए एक डमी फर्म का प्रोपराइटर बनकर विधायकों से संपर्क किया। रिपोर्टर ने खुद को ठेकेदार बताकर विधायक निधि से काम दिलाने की डील की। परिणाम चौंकाने वाले थे:
खींवसर से भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा: उन्होंने साफ-साफ कहा, "40 प्रतिशत दो, तो 50 लाख का काम दूंगा।" स्टिंग में वे कमीशन की मोलभाव करते दिखे और अनुशंसा लेटर जारी कर दिया।
हिंडौन से कांग्रेस विधायक अनीता जाटव: उन्होंने 50 हजार रुपये नकद लेकर 80 लाख का अनुशंसा लेटर दे दिया। स्टिंग में वे काम की गारंटी देते हुए कैमरे में कैद हुईं।
बयाना (भरतपुर) से निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत: उनके पति ने 40 लाख की डील फाइनल की। स्टिंग में वे कमीशन की शर्तें तय करते नजर आए।
तीनों विधायकों ने कुल 1.70 करोड़ की डील की थी। भास्कर की रिपोर्ट ने साबित कर दिया कि पार्टी लाइन से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार में सभी एकजुट हैं – चाहे भाजपा हो, कांग्रेस या निर्दलीय।
अफसरों का हिस्सा: 10 प्रतिशत कमीशन पर 'डील फाइनल'
कमीशन का यह खेल विधायकों के बाद अफसरों तक पहुंचता है। विधायक की अनुशंसा मिलने के बाद प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के लिए अधिकारी जिम्मेदार होते हैं। भास्कर रिपोर्टर ने विधायकों के लेटर लेकर इन अफसरों से संपर्क किया, और वे भी कमीशन की भाषा बोलते पकड़े गए:
करौली के डीईओ (प्रारंभिक) पुष्पेंद्र शर्मा: हिंडौन विधायक अनीता जाटव का 80 लाख का लेटर दिखाने पर उन्होंने कहा, "क्या लिखना है, ये बता देना।" जब वर्क ऑर्डर और बाकी प्रक्रिया में मदद मांगी गई, तो बोले, "कर देंगे!" अंत में 10 प्रतिशत कमीशन पर डील फाइनल हुई। उनका फोन लगातार बज रहा था, लेकिन कमीशन की बात पर वे रुक गए।
मूंडवा के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) कैलाशराम: खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा का लेटर दिखाने पर उन्होंने तुरंत पूछा, "इसमें मेरा क्या फायदा होगा?" जब 5 प्रतिशत कमीशन ऑफर किया गया, तो उन्होंने हिसाब लगाया और बोले, "ठीक है। लेकिन मेरे लिए भी एक दरी फर्श ले आना। घर पर काम आ जाएगा।" यह अधिकारी खुद को नया बताते हुए भी कमीशन की डील में माहिर निकले। डांगा ने खींवसर और मूंडवा के सीबीईओ को कार्यकारी एजेंसी बनाया था, जबकि अनीता जाटव ने करौली के डीईओ को। प्रक्रिया के मुताबिक, विधायक की अनुशंसा के बाद पूरा काम इन एजेंसियों के जिम्मे होता है – लेकिन कमीशन बिना कुछ नहीं होता।
70 प्रतिशत पैसा कमीशन और मुनाफे में: जनता का पैसा लुट रहायह घोटाला और भी चौंकाने वाला है क्योंकि जनता का 70 प्रतिशत पैसा कमीशन और ठेकेदार के मुनाफे में जा रहा है। असली काम में सिर्फ 30 प्रतिशत ही लगता है। उदाहरण के तौर पर:
विधायकों ने 12x15 फीट के प्रति कारपेट की अनुशंसा 25 हजार रुपये की दर पर की।
लेकिन सप्लाई होने वाला कारपेट सिर्फ 5,700 रुपये (30 प्रतिशत) का होता है – साइज वही, लेकिन क्वालिटी घटिया।
इससे ठेकेदार को 50 प्रतिशत (12,500 रुपये) कमीशन बांटने के बाद भी 20 प्रतिशत (5,000 रुपये) का मुनाफा हो जाता है।
तीनों विधायकों की 1.70 करोड़ की डील में कारपेट सिर्फ 51 लाख के आते, कमीशन 85 लाख बंटता, और फर्म को 34 लाख का मुनाफा होता। यानी स्कूलों में बच्चों के लिए कारपेट सप्लाई का बहाना बनाकर करोड़ों का खेल चल रहा है।
सरकार की कार्रवाई: जांच समिति गठित, MLA फंड सीज
इस खुलासे के बाद राजस्थान सरकार हरकत में आई है। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता राज्य के मुख्य सतर्कता आयुक्त (अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग) करेंगे। समिति में मुख्य सचिव और डीजीपी भी शामिल हैं। साथ ही, विधानसभा की सदाचार समिति भी जांच करेगी।
इन विधायकों के MLA लैड (विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास) खाते सीज कर दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि अनुशंसा के नाम पर कमीशन मांगना गंभीर अपराध है, और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।