राजस्थान बजट 2026: बिना दस्तावेज़ वालों को भी मिलेगा मुफ्त इलाज, स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा ऐलान
राजस्थान बजट 2026 में बड़ा फैसला, अब दस्तावेज़ न होने पर भी असहाय मरीजों को मिलेगा मुफ्त इलाज
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी ने वर्ष 2026-27 के बजट में चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर कई अहम घोषणाएं की हैं। इनमें सबसे बड़ा ऐलान उन असहाय लोगों के लिए किया गया है जो दस्तावेजों के अभाव में अब तक इलाज से वंचित रह जाते थे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब ऐसे मरीजों को भी निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री दिया कुमारी ने कहा कि असहाय, विमंदित और लावारिस रोगी जिनके पास पहचान या अन्य जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें मुख्यमंत्री चिकित्सा आरोग्य योजना और निरोगी राज्य योजना के तहत मुफ्त इलाज दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को केवल दस्तावेजों की कमी के कारण इलाज से वंचित न होना पड़े।
दिया कुमारी ने बताया कि सरकार वर्ष 2047 तक ‘समृद्ध राजस्थान, स्वस्थ राजस्थान’ के विजन पर काम कर रही है। इसके तहत प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का यूनिवर्सल कवरेज देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार औसत आयु को 77 वर्ष से अधिक करने, मातृ मृत्यु दर को घटाकर 15 प्रति लाख और शिशु मृत्यु दर को 10 प्रति हजार से कम करने की दिशा में कार्य करेगी।
सड़क दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में त्वरित इलाज के लिए ‘राज सुरक्षा – राजस्थान सिस्टम फॉर अर्जेंट रिस्पांस एक्सीडेंट स्टेबलाइजेशन एंड हॉस्पिटल एक्सेस योजना’ लागू की जाएगी। इसके अंतर्गत 24 घंटे का कमांड सेंटर स्थापित होगा, जो नजदीकी अस्पताल और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी देगा।
हार्ट अटैक की समय पर पहचान के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेली एक्स थ्रॉम्बोलाइसिस सुविधा शुरू की जाएगी। वहीं, संभाग स्तर पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को कार्डियक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण दिया जाएगा। सड़क हादसों में मौत कम करने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस धारकों के लिए सीपीआर प्रशिक्षण अनिवार्य करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
राज्य में चरणबद्ध तरीके से 250 आधुनिक एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाएंगी और हाईवे रेस्ट एरिया पर एंबुलेंस तैनात होंगी। ट्रॉमा सेवाओं के सुधार के लिए 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सभी अस्पतालों में फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाने के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही, प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में मरीजों और परिजनों के लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से विश्रामगृह बनाए जाएंगे।