प्रतापगढ़ में भू माफिया का पर्दाफाश, कलेक्टर की रिपोर्ट से बड़ा प्रशासनिक खुलासा

प्रतापगढ़ में 1015 बीघा सरकारी जमीन घोटाले का खुलासा, कलेक्टर की रिपोर्ट से भू माफिया नेटवर्क बेनकाब

Feb 6, 2026 - 10:35
प्रतापगढ़ में भू माफिया का पर्दाफाश, कलेक्टर की रिपोर्ट से बड़ा प्रशासनिक खुलासा

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में सरकारी जमीनों से जुड़े बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया की 19 पन्नों की जांच रिपोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही, राजनीतिक संरक्षण और भू माफिया नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट सामने आते ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, वहीं प्रदेश स्तर पर कड़ी कार्रवाई के संकेत भी मिले हैं।

1015 बीघा राजकीय भूमि पर गंभीर सवाल

जांच में सामने आया कि प्रतापगढ़ शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 1015 बीघा राजकीय भूमि से जुड़े 87 मामलों में भारी अनियमितताएं हुईं। राष्ट्रीय राजमार्ग और बायपास से सटी कीमती सरकारी जमीनें कामदारों और डमी काश्तकारों के नाम आवंटित की गईं। बाद में इन्हीं जमीनों को निजी कॉलोनियों और व्यावसायिक गतिविधियों में बदल दिया गया, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व नुकसान हुआ।

सरकारी अभियानों का दुरुपयोग

रिपोर्ट में बताया गया कि “प्रशासन गांवों के संग” और “प्रशासन शहरों के संग” अभियान 2021-22 का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया। नियमों को दरकिनार कर भूमि आवंटन किए गए। अब राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 और कृषि भूमि आवंटन नियम 1970 के तहत कई आवंटनों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

नगर परिषद क्षेत्र में भी अनियमितताएं

नगर परिषद प्रतापगढ़ में भी अवैध पट्टों और नीलामी से जुड़े मामले उजागर हुए हैं। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों ने अपने और परिचितों के नाम पर भूखंड आवंटित कर बाद में असली लाभार्थियों को सौंप दिए। तत्कालीन सभापति, पार्षदों और उनके परिजनों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

प्राकृतिक नाले पर अतिक्रमण

जांच में यह भी सामने आया कि शहर के बीच से गुजरने वाले प्राकृतिक नाले को ढककर उस पर निर्माण कर दिया गया। नाला भूमि पर बने तीन आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों की नीलामी बाद में निरस्त कर दी गई। इसके अलावा मानपुरा क्षेत्र में जारी 31 अवैध पट्टे भी रद्द किए गए हैं।

विशेष शाखा की रिपोर्ट और सोशल मीडिया दुरुपयोग

राजस्थान पुलिस की विशेष शाखा की रिपोर्ट में भी कुछ पार्षदों, स्थानीय व्यवसायियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका का उल्लेख है। यह रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेजी गई है। वहीं कुछ लोग वर्तमान में किसी पद पर न होने के बावजूद खुद को पार्षद या सभापति बताकर सोशल मीडिया पर प्रभाव दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जिस पर पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।

आत्महत्या प्रकरण और आगे की कार्रवाई

भूमि लेनदेन से जुड़े दबाव के कारण समाजसेवी मुस्तफा बोहरा की आत्महत्या का मामला इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बनाता है। आरोप है कि जांच में लापरवाही हुई और उच्च न्यायालय की गाइडलाइंस का पालन नहीं किया गया। कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और उच्च स्तरीय जांच व कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।