अजमेर दरगाह विवाद: शिव मंदिर दावे पर कोर्ट में याचिका, राठौड़ का तीखा बयान

अजमेर दरगाह परिसर में शिव मंदिर के दावे पर कोर्ट में याचिका दायर, राठौड़ बोले– नहीं मिला शिवलिंग तो फांसी मंजूर

Jan 12, 2026 - 18:46
अजमेर दरगाह विवाद: शिव मंदिर दावे पर कोर्ट में याचिका, राठौड़ का तीखा बयान

अजमेर दरगाह शरीफ परिसर से जुड़े एक विवादित दावे ने एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय महाराणा प्रताप सेना की ओर से अजमेर जिला न्यायालय में एक याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस याचिका में दरगाह परिसर में शिव मंदिर होने के दावे की निष्पक्ष जांच, सर्वे और आवश्यकता पड़ने पर खुदाई कराने की मांग की गई है।संगठन का कहना है कि यह विषय केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की सच्चाई सामने आनी चाहिए। याचिका दायर होने की खबर के बाद से अजमेर शहर में चर्चा और बहस का माहौल बना हुआ है।

पुष्कर में पूजा, फिर अजमेर रवाना हुई टीम

याचिका दायर करने से पहले महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज्यवर्धन सिंह राठौड़ अपने अधिवक्ताओं की टीम के साथ पुष्कर पहुंचे। वहां उन्होंने पुष्कर सरोवर में विधिवत पूजा-अर्चना की। यह पूजा तीर्थ पुरोहित मधुसूदन पाराशर द्वारा संपन्न करवाई गई।पूजा के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस प्रशासन की ओर से अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पूजा के बाद डॉ. राठौड़ अपनी टीम के साथ अजमेर के लिए रवाना हुए, जहां जिला न्यायालय में याचिका पेश करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई।

संगठन का दावा: आस्था नहीं, इतिहास की जांच जरूरी

राष्ट्रीय महाराणा प्रताप सेना का कहना है कि उनकी मांग किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं है। संगठन के अनुसार, यह मामला ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़ा हुआ है, जिसकी निष्पक्ष जांच न्यायालय के निर्देश पर होनी चाहिए।संगठन का यह भी कहना है कि संविधान और कानून के दायरे में रहकर न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सच्चाई सामने लाना उनका उद्देश्य है। इसी आधार पर अदालत से सर्वे और जांच कराने की मांग की गई है।

अगर शिवलिंग न मिला तो फांसी भी मंजूर”

मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अपने दावे को लेकर बेहद तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय के आदेश पर सर्वे या खुदाई कराई जाती है और वहां शिव मंदिर या शिवलिंग नहीं मिलता, तो वह स्वयं को फांसी की सजा के लिए तैयार मानते हैं।उनके इस बयान के बाद राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक स्तर पर बहस और तेज हो गई है। कुछ लोग इसे भावनात्मक बयान बता रहे हैं, तो कुछ इसे कानूनी प्रक्रिया पर दबाव बनाने का प्रयास मान रहे हैं।

वकील का पक्ष: फैसला न्यायालय करेगा

इस मामले में संगठन की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एस.पी. सिंह ने स्पष्ट किया कि याचिका पूरी तरह कानूनी और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर दायर की गई है। उन्होंने कहा कि याचिका में किसी तरह की गैर-कानूनी मांग नहीं की गई है।अधिवक्ता ने यह भी साफ किया कि अंतिम निर्णय पूरी तरह न्यायालय के हाथ में है और सभी पक्षों को अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए।

देशभर की नजरें अदालत की अगली कार्रवाई पर

अजमेर दरगाह शरीफ देश के प्रमुख और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में गिनी जाती है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी विवाद पर स्वाभाविक रूप से पूरे देश की नजरें टिकी रहती हैं। याचिका दायर होने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि अदालत इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है।फिलहाल, यह मामला कानूनी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए आने वाले दिनों में इस पर चर्चा और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।