सीमांकन पर सियासी भूचाल: सांसद उमेद राम बेनीवाल का सरकार पर बड़ा हमला

बाड़मेर–बालोतरा सीमांकन पर सांसद उमेद राम बेनीवाल का तीखा विरोध, जनभावनाओं के खिलाफ फैसले पर पुनर्विचार की मांग

Jan 3, 2026 - 12:53
सीमांकन पर सियासी भूचाल: सांसद उमेद राम बेनीवाल का सरकार पर बड़ा हमला

राजस्थान में बाड़मेर–बालोतरा जिलों के सीमांकन को लेकर जारी हालिया अधिसूचना पर सियासी हलचल तेज हो गई है। बाड़मेर–जैसलमेर सांसद उमेद राम बेनीवाल ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे जनहित के बजाय जनभावनाओं के खिलाफ बताया है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले में पुनर्विचार करने की मांग की है। सांसद का कहना है कि वर्तमान सीमांकन से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और प्रशासन व जनता के बीच दूरी बढ़ेगी।


सांसद का आरोप: जनभावनाओं के खिलाफ फैसले

सांसद उमेद राम बेनीवाल ने बयान जारी कर कहा कि सरकार द्वारा किया गया यह सीमांकन एक तरह की “तुगलकी व्यवस्था” है। उनके अनुसार पूर्व में लिए गए फैसलों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को जनता के नजदीक लाना था, ताकि लोगों को अपने कामों के लिए दूर न जाना पड़े। लेकिन मौजूदा अधिसूचना से इसके उलट हालात बन रहे हैं।उन्होंने कहा कि इस तरह के निर्णय बिना जनसुनवाई और स्थानीय जरूरतों को समझे थोपे गए हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।

बायतु, गुड़ामालानी और धोरिमन्ना पर आपत्ति

सांसद ने विशेष रूप से बायतु, गुड़ामालानी और धोरिमन्ना क्षेत्रों के परिसीमन पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बायतु पंचायत समिति को बाड़मेर जिले में रखते हुए इसके आसपास के क्षेत्रों को बालोतरा जिले में शामिल करना पूरी तरह अव्यावहारिक है।इसी तरह धोरिमन्ना उपखंड को बाड़मेर से हटाकर बालोतरा में जोड़ने के फैसले को भी उन्होंने स्थानीय भावनाओं से खिलवाड़ बताया। गुड़ामालानी के पश्चिमी और दक्षिणी गांवों के पुनर्गठन को लेकर भी सांसद ने सवाल उठाए और कहा कि इससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ेगा।


आमजन की बढ़ेंगी परेशानियां

उमेद राम बेनीवाल ने कहा कि इस सीमांकन का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। तहसील, उपखंड, राजस्व कार्यालय, न्यायालय और विकास से जुड़े कार्यों के लिए लोगों को अब अधिक दूरी तय करनी होगी।उन्होंने बताया कि कई गांवों के लोगों को अपने दैनिक प्रशासनिक कामों के लिए बाड़मेर या अन्य दूरस्थ स्थानों पर जाना पड़ेगा। इससे समय, धन और श्रम की अनावश्यक बर्बादी होगी। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब और बुजुर्ग लोगों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो सकती है।

कानून-व्यवस्था और आपात सेवाओं पर असर

सांसद ने सीमांकन से कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि थाना क्षेत्राधिकार और उपखंड कार्यालयों में बदलाव से पुलिस और प्रशासन के कामकाज में भ्रम की स्थिति पैदा होगी।आपातकालीन सेवाओं, जैसे पुलिस, एंबुलेंस और राहत कार्यों में भी देरी हो सकती है। इससे आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित होंगी।


सरकार से पुनर्विचार की मांग

अपने बयान के अंत में सांसद उमेद राम बेनीवाल ने राज्य सरकार से अपील की कि वह इस फैसले पर गंभीरता से पुनर्विचार करे। उन्होंने कहा कि सीमांकन से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम जनता से राय ली जानी चाहिए।सांसद का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में जनहित चाहती है, तो उसे ऐसे बदलाव करने होंगे जो जनता की सुविधा बढ़ाएं, न कि उनकी परेशानियां।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

इस मुद्दे पर सांसद के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर भी लोगों में असंतोष देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस विरोध को किस तरह लेती है और सीमांकन को लेकर कोई संशोधन करती है या नहीं।