बाड़मेर में भाजपा वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का अनोखा विरोध, अपनी ही सरकार पर उठे सवाल
बाड़मेर में भाजपा वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने सड़क पर स्नेहमिलन कर प्रशासन और संगठन की अनदेखी पर नाराजगी जताई।
राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने अपनी ही सरकार के खिलाफ अनोखे तरीके से नाराजगी जताई। शहर के सुभाष चौक पर मुख्य सड़क के बीच कुर्सियां लगाकर “स्नेहमिलन कार्यक्रम” आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जनसंघ काल से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने संगठन में अनदेखी, पदाधिकारियों की उपेक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए।
प्रशासनिक अधिकारियों पर तानाशाही के आरोप
कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार होने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी पार्टी कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनते। कई बार उन्हें दफ्तरों से धक्के देकर बाहर निकाल दिया जाता है। वरिष्ठ नेताओं का कहना था कि कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई गंभीरता नजर नहीं आती, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है।
जनसुनवाई में अधिकारियों की गैरहाजिरी
भाजपा के वरिष्ठ नेता जोगराज सिंह राजपुरोहित ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को लेकर प्रशासन द्वारा जनसुनवाई बैठक बुलाई गई थी, लेकिन मौके पर केवल एसडीएम ही पहुंचे। अन्य अधिकारियों की अनुपस्थिति पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यह बेहद विचित्र स्थिति है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार अपनी होने के बावजूद कार्यकर्ताओं के हाथ में कुछ नहीं है।
कांग्रेस शासन और वर्तमान हालात की तुलना
कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता स्वरूप सिंह राठौड़ ने चुनावी अनुभव साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान भी पार्टी के किसी कार्यकर्ता की जमानत कभी जब्त नहीं हुई थी, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के दो प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इसके बावजूद हम खुद को सक्षम मानते हैं, यह आत्ममंथन का विषय है।
स्नेहमिलन का उद्देश्य और आयोजन स्थल
स्वरूप सिंह राठौड़ ने बताया कि यह स्नेहमिलन संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर खुलकर चर्चा करने के उद्देश्य से रखा गया है। सड़क के बीच कार्यक्रम आयोजित करने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा कार्यालय शहर से काफी दूर है, जहां वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का पहुंचना मुश्किल होता है। इसलिए सुभाष चौक जैसे सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम रखा गया ताकि अधिक से अधिक लोग जुड़ सकें और सीधा संवाद हो सके।