बाड़मेर में नर्मदा नहर का कहर: बांटा गांव में टूटी माइनर, घरों में दरारें, जीरे की फसल डूबी; लापरवाही के आरोप।

बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र के बांटा गांव में नर्मदा नहर की बांटा माइनर टूटने से नहर का पानी घरों और खेतों में घुस गया। एक मकान में दरारें आ गईं, जबकि जीरे की खड़ी फसल को नुकसान हुआ। समय रहते मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर हटा लिया गया। सूचना पर पटवारी ने मौके पर पहुंचकर फर्द रिपोर्ट तैयार की। ग्रामीणों ने नहर में तय सीमा से अधिक पानी छोड़े जाने का आरोप लगाते हुए ठेकेदार और नहर कार्मिकों की लापरवाही की जांच तथा पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की है।

Jan 29, 2026 - 09:47
बाड़मेर में नर्मदा नहर का कहर: बांटा गांव में टूटी माइनर, घरों में दरारें, जीरे की फसल डूबी; लापरवाही के आरोप।
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बाड़मेर

जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र के बांटा गांव में नर्मदा नहर की बांटा माइनर टूटने से अफरा-तफरी मच गई। नहर के टूटते ही पानी आसपास के घरों और खेतों में घुस गया, जिससे एक मकान में दरारें आ गईं, जबकि जीरे की खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है। समय रहते ग्रामीणों ने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर हटा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

घर में घुसा नहर का पानी, दीवारों में आईं दरारें

ग्रामीणों के अनुसार, नर्मदा नहर बांटा माइनर के टूटने के बाद पानी सीधे किसान मालाराम पुत्र नैनाराम के घर में जा घुसा। तेज बहाव के कारण मकान की दीवारों में दरारें पड़ गईं। वहीं आसपास के खेतों में पानी भर जाने से जीरे की फसल बर्बाद हो गई।

किसानों ने प्रशासन को दी सूचना

घटना के बाद किसानों और ग्रामीणों ने तुरंत एसडीएम सहित प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी। साथ ही नहर विभाग के कार्मिकों को भी अवगत कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर पानी की निकासी नहीं होती, तो नुकसान और भी बढ़ सकता था।

पटवारी ने किया मौका मुआयना, फर्द रिपोर्ट तैयार

सूचना मिलने पर पटवारी बाबुलाल मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने फर्द रिपोर्ट में उल्लेख किया कि नहर टूटने से घरों में पानी घुसा, दीवारों में दरारें आईं और खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है।

ग्रामीणों का आरोप: सीमा से अधिक पानी छोड़ा गया

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नहर में निर्धारित सीमा से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण यह हादसा हुआ। उनका कहना है कि यह ठेकेदार और नर्मदा नहर के जिम्मेदार कार्मिकों की लापरवाही का नतीजा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पीड़ित किसानों को मुआवजा दिया जाए।

जांच और राहत की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से न केवल नहर की तत्काल मरम्मत, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी समाधान की भी मांग की है। फिलहाल क्षेत्र में हालात पर नजर रखी जा रही है।

नर्मदा नहर टूटने से सबसे बड़ा दर्द किसान को झेलना पड़ा। खेतों में खड़ी जीरे की फसल, जिसे किसान ने महीनों की मेहनत, कर्ज और उम्मीदों से सींचा था, पल भर में पानी में डूब गई। किसान का कहना है कि बीज, खाद, दवाइयों और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए गए थे, अब सब बह गया।

किसान ने भारी मन से कहा, “फसल ही हमारी रोज़ी-रोटी है। इसी से बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और कर्ज चुकाना होता है। नहर टूटने से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करना हमारे बस में नहीं है।”

अचानक आए पानी ने मेहनत की पूरी कमाई छीन ली। किसान प्रशासन से मुआवजे और दोषियों पर कार्रवाई की गुहार लगा रहे हैं, ताकि उनका उजड़ा हुआ सहारा कुछ हद तक वापस मिल सके।

Nathusingh BA/MA Arts