बीकानेर में खेजड़ी बचाओ महापड़ाव तेज, अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने से हालात गंभीर
बीकानेर खेजड़ी बचाओ आंदोलन में बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ी, 363 लोग अनशन पर डटे, स्थिति गंभीर।
बीकानेर में खेजड़ी बचाओ महापड़ाव के दौरान अनशन पर बैठे एक बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ने से हालात चिंताजनक हो गए हैं। पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर चल रहा यह आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजस्थान में संभवतः यह पहली बार है, जब इतनी बड़ी संख्या में लोग किसी एक वृक्ष प्रजाति के संरक्षण के लिए अनशन पर बैठे हों।
पर्यावरण से आगे बढ़कर संवेदना और संस्कृति का सवाल
खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि लोगों की भावनाओं, संस्कृति और जनआस्था से भी जुड़ गया है। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री सहित कई जनप्रतिनिधि इस आंदोलन के समर्थन में सामने आ चुके हैं। इससे साफ है कि यह विषय राजनीति की सीमाओं से ऊपर उठकर जनहित के मुद्दे के रूप में उभर रहा है।
सरकार से संवाद की जरूरत
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक खेजड़ी संरक्षण के लिए कोई मजबूत और स्पष्ट कानून नहीं बनता, तब तक महापड़ाव जारी रहेगा। ऐसे माहौल में विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जल्द पहल करते हुए वार्ता दल भेजना चाहिए, ताकि अनशन पर बैठे लोगों की समस्याओं को समझकर समाधान का रास्ता निकाला जा सके। लोगों की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए संवाद की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
संत समाज ने जताई नाराजगी
मुकाम पीठाधीश्वर श्री रामानंद जी महाराज के सानिध्य में हुई जनसभा में संतों ने सरकार पर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि सरकार खुद को सनातनी बताती है, लेकिन कार्यों में सनातन मूल्यों का प्रतिबिंब नजर नहीं आता। जनसभा के दौरान कई लोगों ने अनशन में शामिल होने की इच्छा जताई और शाम को कई समर्थकों ने भोजन करने से भी मना कर दिया। बाद में शांति बनाए रखने की अपील की गई।
363 लोग अनशन पर, आगे की स्थिति पर निगाहें
फिलहाल 363 लोग अनशन पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह महापड़ाव तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार खेजड़ी संरक्षण पर कोई कठोर व प्रभावी कानून लागू नहीं करती। आने वाले दिन महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि सरकार की ओर से वार्ता या आश्वासन मिलने पर ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।