लोकसभा में गूंजी खेजड़ी बचाने की आवाज, सांसद हनुमान बेनीवाल ने की सख्त कानून की मांग
खेजड़ी संरक्षण को लेकर लोकसभा में हंगामा, सांसद हनुमान बेनीवाल ने ट्री प्रोटेक्शन एक्ट की मांग उठाई
राजस्थान के बीकानेर में खेजड़ी वृक्ष को बचाने की मांग को लेकर चल रहे जन आंदोलन की गूंज अब संसद तक पहुंच गई है। नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए खेजड़ी के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने खेजड़ी को राजस्थान की पर्यावरणीय व्यवस्था, जैव विविधता और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बताया।
सदन में प्रदर्शन, बाहर धरना
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सांसद हनुमान बेनीवाल वेल में पहुंचे और खेजड़ी बचाने की मांग से जुड़ी तख्ती लहराई। इस दौरान उन्होंने सरकार का ध्यान खेजड़ी के लगातार हो रहे कटान की ओर आकर्षित करने की कोशिश की। बाद में सदन की कार्यवाही स्थगित होने पर वे लोकसभा के प्रवेश द्वार पर धरने पर बैठ गए। इस मुद्दे पर उन्हें विभिन्न दलों के कई सांसदों का समर्थन भी मिला, जिससे खेजड़ी संरक्षण की मांग और मजबूत होती दिखी।
पर्यावरण और आजीविका की जीवनरेखा
प्रेस से बातचीत में सांसद बेनीवाल ने कहा कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थलीय राजस्थान की जीवनरेखा है। यह वृक्ष न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि किसानों और पशुपालकों की आजीविका से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। खेजड़ी की पत्तियां और फल पशुओं के लिए उपयोगी हैं, वहीं इसकी मौजूदगी मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायक होती है।
विकास के नाम पर अंधाधुंध कटाई का आरोप
सांसद ने आरोप लगाया कि सोलर परियोजनाओं, सड़क निर्माण, औद्योगिक गतिविधियों और अन्य विकास कार्यों के नाम पर खेजड़ी के बड़े पैमाने पर कटान के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है और स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान में खेजड़ी को बचाने के लिए जन आंदोलन चल रहा है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई प्रभावी नीति या ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इस दिशा में गंभीरता दिखाने की अपील की।
ट्री प्रोटेक्शन एक्ट की मांग
सांसद बेनीवाल ने खेजड़ी सहित अन्य महत्वपूर्ण वृक्षों के संरक्षण के लिए सख्त “ट्री प्रोटेक्शन एक्ट” बनाने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक कानून के जरिए पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाना मुश्किल होगा। खेजड़ी संरक्षण को लेकर उठी यह आवाज अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती नजर आ रही है।