दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 के परिणाम शुक्रवार को घोषित किए गए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार में से तीन प्रमुख पदों – अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और संयुक्त कोषाध्यक्ष – पर जीत हासिल की। जबकि नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) केवल उपाध्यक्ष पद पर कब्जा कर सकी। इस बार 1.53 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से 60,272 ने मतदान किया, जो 39.36% मतदान प्रतिशत है। यह पिछले साल के 35.2% की तुलना में अधिक है। मतगणना नॉर्थ कैंपस के यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम में 20 दौर में पूरी हुई।
क्या रहा परिणाम
अध्यक्ष (President) ; ABVP के आर्यन मान ने 28,841 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। NSUI की जोस्लिन नंदिता चौधरी को 12,645 वोट मिले, और वे 16,196 वोटों के बड़े अंतर से हारीं। लेफ्ट गठबंधन (SFI-AISA) की उम्मीदवार को 5,385 वोट प्राप्त हुए। जीत के बाद आर्यन मान ने कहा, "यह छात्रों का विश्वास है। हम मेट्रो पास सब्सिडी, फ्री वाई-फाई और बेहतर स्पोर्ट्स सुविधाओं पर काम करेंगे।"
उपाध्यक्ष (Vice President) ; NSUI के राहुल झांसला ने 29,339 वोटों के साथ जीत हासिल की। ABVP के गोविंद तंवर को लगभग 24,000 वोट मिले, और वे करीब 5,339 वोटों से हारे। यह NSUI की इस चुनाव में एकमात्र जीत रही।
कोषाध्यक्ष (Secretary) ; ABVP के कुणाल चौधरी ने 23,779 वोटों के साथ पद पर कब्जा किया। NSUI के कबीर को 16,177 वोट मिले, जबकि SFI-AISA को 9,535 वोट प्राप्त हुए। चौधरी ने जीत को छात्रों की एकता का नतीजा बताया।
संयुक्त कोषाध्यक्ष (Joint Secretary) ; ABVP की दीपिका झा ने 21,825 वोटों के साथ जीत दर्ज की। NSUI के लवकुश भदाना को 17,380 और SFI-AISA को 8,425 वोट मिले। दीपिका ने छात्र कल्याण को अपनी प्राथमिकता बताया।
हार-जीत का विश्लेषण
ABVP ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन पदों पर जीत हासिल की, जो पिछले साल के NSUI के दो पदों की जीत के मुकाबले बड़ा उलटफेर है। NSUI को केवल उपाध्यक्ष पद पर सफलता मिली, जहां राहुल झांसला ने मजबूत प्रदर्शन किया। लेफ्ट गठबंधन (SFI-AISA) सभी पदों पर तीसरे स्थान पर रहा और कोई सीट नहीं जीत सका। NSUI के एक नेता ने हार स्वीकार करते हुए कहा, "हमने पूरी ताकत लगाई, लेकिन कुछ बाहरी दबावों का सामना करना पड़ा। हम अगले साल और मजबूती से वापसी करेंगे।"
चुनावी माहौल और सुरक्षा
चुनाव के दौरान दिल्ली पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर विजय जुलूस पर रोक रही, जिसका पालन किया गया। मतदान से पहले 26 सितंबर को हुए प्रचार के दौरान कई कॉलेजों में तनावपूर्ण माहौल देखा गया, लेकिन मतगणना शांतिपूर्ण रही।
राजनीतिक महत्व और प्रतिक्रिया
DUSU चुनाव को राष्ट्रीय राजनीति का एक अहम मंच माना जाता है, क्योंकि यह युवा नेताओं के लिए भविष्य की राह तैयार करता है। ABVP की जीत को कई लोग छात्रों के बीच राष्ट्रवादी विचारधारा की मजबूती के रूप में देख रहे हैं। NSUI ने अपनी हार के बावजूद उपाध्यक्ष पद की जीत को सकारात्मक बताया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने छात्रों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, किफायती शिक्षा और कैंपस सुविधाओं को प्राथमिकता देने का वादा किया है।
क्या है अहम मुद्दे
नए पदाधिकारियों का कार्यकाल अगस्त 2026 तक रहेगा। इस दौरान छात्र कल्याण, मेट्रो पास सब्सिडी, फ्री वाई-फाई और स्पोर्ट्स सुविधाओं जैसे मुद्दों पर काम करने की उम्मीद है। DUSU चुनाव के नतीजे एक बार फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों की प्राथमिकताओं और राजनीतिक रुझानों को दर्शाते हैं।